बस्तर ओलंपिक को लेकर सामने आए आंकड़ों ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। राज्य की कुल आबादी जहां लगभग 3.08 से 3.10 करोड़ बताई जाती है, वहीं सरकारी दावों और प्रचार में ऐसे आंकड़े सामने आए, जिनमें कहा गया कि पिछले आयोजन में 1.65 करोड़ युवाओं ने हिस्सा लिया और इस बार 3.91 करोड़ लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया।
इन दावों ने लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि वास्तविकता में बस्तर ओलंपिक के आधिकारिक आंकड़े लाखों में हैं, करोड़ों में नहीं। यही वजह है कि अब सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार लगातार “रिकॉर्ड” और “ऐतिहासिक उपलब्धि” जैसे दावे कर रही है, लेकिन जब आंकड़ों में ही इतनी बड़ी उलट-फेर दिख रही है, तो उपलब्धियों की सच्चाई पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
विपक्ष और आम लोगों का कहना है कि —
जब राज्य की कुल आबादी ही 3 करोड़ के आसपास है, तो करोड़ों प्रतिभागियों का दावा कैसे संभव है?
क्या यह सिर्फ “लाख” और “करोड़” की गलती है या जानबूझकर उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की कोशिश?
अगर खेल आयोजन के आंकड़ों में इतनी गड़बड़ी हो सकती है, तो क्या योजनाओं और खर्चों में भी इसी तरह का खेल चल रहा होगा?
अब यह मामला सिर्फ बस्तर ओलंपिक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार की पारदर्शिता और भरोसे पर बड़ा सवाल बन गया है।



