भारत में मिलावटी दवाओं का कारोबार लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। कई राज्यों में दवा के सैंपलों की जांच में देरी और दोषियों को सजा दिलाने में सुस्ती के चलते यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। कुछ राज्यों ने कार्रवाई शुरू की है, लेकिन अधिकतर जगहों पर जांच और सजा की रफ्तार बेहद धीमी है।
मध्य प्रदेश: जांच क्षमता से ज्यादा सैंपल
मध्य प्रदेश में 2024 तक केवल भोपाल में एक ही लैब थी, जिसकी क्षमता प्रति वर्ष 4,000 सैंपलों की जांच की थी। अब इंदौर और जबलपुर में दो नई लैब शुरू की गई हैं, लेकिन प्रदेश में हर साल 7,000 से ज्यादा सैंपल जांच के लिए आते हैं। 2024 में 7,211 सैंपल आए, लेकिन केवल 4,398 की जांच हो पाई, जिनमें 51 सैंपल अमानक पाए गए। पिछले साल केवल एक मामले में ही सजा दिलाई जा सकी।
झारखंड: जांच जारी, कार्रवाई नहीं
झारखंड में कोल्ड्रिफ कफ सीरप की आपूर्ति नहीं हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने सभी तरह की कफ सीरप की जांच के लिए अस्पतालों और मेडिकल दुकानों से सैंपल लिए हैं। हालांकि अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
उत्तराखंड: सैंपल जांच प्रक्रिया जारी
उत्तराखंड में फिलहाल किसी कंपनी पर सीधी कार्रवाई नहीं हुई। राज्य में सात मेडिकल दुकानों को सील किया गया और 44 प्रतिबंधित सीरप की बोतलें नष्ट की गईं। अब तक 190 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
हरियाणा: चार दवाओं पर रोक
हरियाणा सरकार ने मिलावटी दवाओं की बिक्री रोकने के लिए चार खांसी की दवाओं पर प्रतिबंध लगाया है। इन दवाओं में डायएथिलीन ग्लाइकाल जैसे खतरनाक रसायन पाए गए, जो बच्चों के लिए घातक हैं। सभी सैंपल जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़: ब्लैकलिस्ट कंपनी से खरीद जारी रही
छत्तीसगढ़ में 2014 में बिलासपुर के नसबंदी शिविर में 13 महिलाओं की मौत के बाद पता चला कि दवा में जिंक फास्फाइड (चूहे मारने वाला केमिकल) मिला था। महावर फार्मा और कविता फार्मा के लाइसेंस रद्द किए गए, लेकिन रिपोर्ट में सामने आया कि राज्य सरकार ने ब्लैकलिस्ट कंपनी से भी दवाएं खरीदना जारी रखा था।
दिल्ली: 14 मामले, केवल 3 में सजा
दिल्ली में 2022 से 2025 के बीच नकली दवा के 14 मामले दर्ज हुए। 18.60 करोड़ रुपये की दवाएं नकली पाई गईं। 10 मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन केवल तीन में सजा मिली। जुलाई 2025 में पश्चिम विहार और सिविल लाइन्स में की गई छापेमारी में 11 गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण सजा में देरी हो रही है।
देशव्यापी स्थिति चिंताजनक
देश के कई हिस्सों में दवा सैंपलों की जांच और न्यायिक कार्रवाई में देरी से मिलावटी दवा का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर जांच और सख्त सजा नहीं दी गई, तो इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा।







