रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल शुक्रवार को संसद की प्राक्कलन समिति (एस्टिमेट्स कमेटी) के आधिकारिक दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे, जहां उन्होंने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया, और भारत-चीन सीमा पर स्थित ‘पहले गांव’ माना में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ की प्रगति की समीक्षा की।
संसदीय दल के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल और अन्य सांसदों के साथ सांसद अग्रवाल ने पहले केदारनाथ धाम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की, फिर बद्रीनाथ धाम गए, और इस दौरान उन्होंने देश की जनता के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के लोगों की खुशहाली, सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।


केदारनाथ में समिति ने “देश में धार्मिक स्थलों पर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा” विषय पर विस्तृत समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के मद्देनजर सुगम आवागमन और आधुनिक बुनियादी ढांचा, आपदा प्रबंधन और कड़े सुरक्षा इंतजाम, तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चारधाम और अन्य प्रमुख धामों में हुए विकास को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से और मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। श्री अग्रवाल ने कहा कि आस्था केंद्रों पर आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए सुविधाओं और सुरक्षा को और बेहतर बनाना समय की मांग है।


बैठक में सांसद अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थस्थलों के समग्र विकास की बात भी रखी और कहा कि जिस तरह हिमालयी तीर्थक्षेत्रों में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ के माता बम्लेश्वरी धाम (डोंगरगढ़), मां दंतेश्वरी मंदिर (दंतेवाड़ा), बाबा भोरमदेव, राजीव लोचन मंदिर (राजिम) और सिरपुर जैसे केंद्रों में भी आधुनिक सुविधाएं, बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा तंत्र जरूरी है, और प्राक्कलन समिति के इस दौरे से मिले सुझाव और अनुभव छत्तीसगढ़ के तीर्थ पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती से स्थापित करने में मददगार होंगे।
धार्मिक स्थलों के निरीक्षण के बाद दल ने भारत-चीन सीमा पर स्थित ‘पहले गांव’ माना का दौरा किया, जहां गृह मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार और स्थानीय हितधारकों के साथ “वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम” की समीक्षा बैठक हुई। इस कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों में सड़क, संचार, बिजली, स्वास्थ्य और स्थानीय आजीविका से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया गया और श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए, साथ ही कहा कि सीमांत गांव देश की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रहरी हैं, इसलिए इनका सर्वांगीण विकास केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
पृष्ठभूमि के तौर पर बता दें कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2023 में शुरू हुआ था और इसमें उत्तराखंड समेत कई सीमावर्ती राज्यों के सैकड़ों गांवों में हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई पूरे भी हो चुके हैं।
संक्षेप में, सांसद बृजमोहन अग्रवाल के उत्तराखंड दौरे का मकसद सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा-सुविधाओं और सीमावर्ती गांवों के विकास जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर जमीनी हकीकत जानना और छत्तीसगढ़ के लिए भी उससे सीख लेकर अपने यहां के तीर्थस्थलों के विकास को नई गति देना रहा।






