रायपुर के पंडरीतराई इलाके में ग्राम सेवा समिति की करोड़ों रुपये कीमती जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। तहसीलदार रायपुर ने जमीन के विनिमय (अदला-बदली) के बाद नामांतरण के लिए आए आवेदन को खारिज कर दिया है। आपत्तिकर्ताओं का आरोप है कि समिति एक सार्वजनिक न्यास है और बिना जरूरी अनुमति के जमीन बेची जा रही है।
जमीन विनिमय का मामला क्या है?
मामला ग्राम पंडरीतराई, पटवारी हल्का नंबर 47, तहसील व जिला रायपुर की शीट नंबर 28, प्लॉट नंबर 1 से जुड़ा है। बबिता अग्रवाल के नाम दर्ज खसरा नंबर 205/1 की 0.0220 हेक्टेयर भूमि और ग्राम सेवा समिति के नाम दर्ज करीब 10.38 एकड़ भूमि में से 0.0220 हेक्टेयर भूमि का आपसी विनिमय किया गया था। इसके लिए 14 अक्टूबर 2025 को पंजीकृत विनिमय विलेख (तबादलानामा) निष्पादित किया गया और इसी के आधार पर बबिता अग्रवाल ने तहसीलदार न्यायालय में नामांतरण के लिए आवेदन किया था।

आपत्तिकर्ताओं ने उठाया न्यास की जमीन का मुद्दा
प्रकरण दर्ज होने के बाद अखबार में इश्तहार छपा, जिसके बाद महंत रामआशीष दास, राहुल गिरी गोस्वामी और एक अन्य ने लिखित आपत्तियां दीं। उनका कहना था कि ग्राम सेवा समिति पंडरीतराई एक सार्वजनिक न्यास है और इसकी जमीन न्यास की संपत्ति है। छत्तीसगढ़ लोक न्यास अधिनियम की धारा 14 के तहत लोक न्यास की अचल संपत्ति के विक्रय, विनिमय, दान या किसी भी तरह के हस्तांतरण के लिए पंजीयक सार्वजनिक न्यास की पूर्व अनुमति जरूरी है।
आपत्तिकर्ता राहुल गोस्वामी ने कहा कि ग्राम सेवा समिति पंडरीतराई 1948 से चल रहा सार्वजनिक न्यास है और पंडरी में इसकी कुल 10.38 एकड़ जमीन है। उनका आरोप है कि वर्तमान में न्यास के सभी ट्रस्टी की मृत्यु हो चुकी है और इसका फायदा उठाकर जमीन पर कब्जा व हस्तांतरण का प्रयास किया जा रहा है।
अजय तिवारी के ट्रस्टी बनने का आवेदन पहले ही खारिज
आपत्तिकर्ताओं ने अपने तर्क में यह भी कहा कि अजय तिवारी ने ग्राम सेवा समिति का ट्रस्टी बनने के लिए आवेदन किया था, लेकिन पंजीयक लोक न्यास एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), रायपुर ने 10 जून 2024 को इस आवेदन को निरस्त कर दिया था। उनका कहना था कि आवेदन निरस्त होने के बाद अजय तिवारी ग्राम सेवा समिति की भूमि का विनिमय करने के लिए अधिकृत नहीं थे।
तहसीलदार के आदेश में 1971 के एक राजस्व प्रकरण का भी जिक्र है, जिसमें नंद कुमार दानी, मंत्री ग्राम सेवा समिति ने खसरा नंबर 267, 268 और 299/1 के हिस्से की भूमि बेचने की अनुमति मांगी थी। हालांकि उस वक्त जमीन की बिक्री नहीं हुई, लेकिन तहसीलदार ने इस रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित भूमि को ग्राम सेवा समिति सार्वजनिक न्यास की जमीन माना।
तहसीलदार ने क्यों खारिज किया आवेदन?
आवेदिका बबिता अग्रवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने 3 अक्टूबर 2025 को निष्पादित विनिमय विलेख के जरिए ग्राम सेवा समिति की ओर से अधिकृत व्यक्ति मंत्री अजय तिवारी के माध्यम से भूमि का विनिमय किया था। उनका तर्क था कि पंजीकृत दस्तावेज के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया में राजस्व न्यायालय को पंजीकृत दस्तावेज की विधि मान्यता की जांच करने का अधिकार नहीं है और यह अधिकार सिविल न्यायालय को है। साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राम सेवा समिति लोक न्यास पंजीयन क्रमांक 35/55 और रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी के यहां पंजीकृत ग्राम सेवा समिति (पंजीयन क्रमांक 37/48) अलग-अलग संस्थाएं हैं।
लेकिन तहसीलदार ने दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि संबंधित भूमि ग्राम सेवा समिति सार्वजनिक न्यास की है और 14 अक्टूबर 2025 के पंजीकृत विनिमय विलेख के आधार पर नामांतरण आवेदन के साथ पंजीयक सार्वजनिक न्यास की अनुमति पेश नहीं की गई है। इसी आधार पर बबिता अग्रवाल का नामांतरण आवेदन खारिज कर दिया गया और प्रकरण के रिकॉर्ड को दफ्तर दाखिल करने का आदेश दिया गया।
आगे क्या कार्रवाई की मांग?
महंत आशीष दास ने कहा कि ग्राम सेवा समिति की जमीन को बेचने की कोशिश हो रही है और तहसीलदार ने नामांतरण आदेश खारिज कर दिया है। ऐसे में तत्काल वहां से निर्माण कार्य हटाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में कमिश्नर को भी आवेदन दिया गया है और अवैध निर्माण हटाने की मांग की गई है।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि रायपुर के पंडरीतराई में ग्राम सेवा समिति की जमीन को लेकर पहले भी बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं। जांच में पाया गया था कि कूटरचना कर करोड़ों रुपये कीमती जमीन को गलत तरीके से लोगों के नाम चढ़ा दिया गया था, जिसमें तत्कालीन तहसीलदार और पटवारी के कृत्य को विधि विरुद्ध माना गया था।





