दुर्ग में नशे के कारोबार से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसमें इंजीनियर के तीन साथी नशीली दवाओं की सप्लाई कर रहे थे। यह गिरोह एक फर्जी दवा कंपनी के नाम से काम कर रहा था और ऑर्डर मिलने पर ग्राहकों तक नशीली दवाएं पहुंचाता था।
इस पूरे मामले की जांच के दौरान सामने आया कि इंजीनियर ने अपने साथियों के साथ मिलकर कंपनी का पंजीकरण कराया था ताकि लोगों को यह लगे कि वे वैध काम कर रहे हैं। लेकिन हकीकत में वे नशे की लत बढ़ाने वाली दवाएं बेचते थे। ग्राहकों से ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से संपर्क कर उन्हें नशीली दवाओं का ऑर्डर दिया जाता था और फिर सप्लाई टीम उन्हें समय पर पहुंचा देती थी।
पुलिस को लंबे समय से इस गिरोह की गतिविधियों पर शक था। जैसे ही पुख्ता सबूत हाथ लगे, तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से भारी मात्रा में नशीली दवाएं, पैकिंग सामग्री और कुछ नकली दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
यह घटना समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। ऐसे मामले यह दिखाते हैं कि शिक्षित लोग भी लालच और गलत राह चुनकर समाज को नुकसान पहुंचा सकते हैं। नशे का जाल युवाओं को बर्बाद करता है और अपराध को बढ़ावा देता है। इस कारण प्रशासन और जनता दोनों को जागरूक रहना चाहिए ताकि ऐसे नेटवर्क समय रहते पकड़े जा सकें और युवाओं को नशे की लत से बचाया जा सके।






