GST 2.0 का असर: कारें सस्ती लेकिन डीलर्स पर 2500 करोड़ का बोझ, ऑटो सेक्टर में हड़कंप

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। जीएसटी 2.0 (GST 2.0) सुधारों ने भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ी हलचल मचा दी है। सरकार द्वारा टैक्स दरों में कटौती और सेस (Cess) हटाने से ग्राहकों के लिए कारें सस्ती हो गई हैं, लेकिन इसका सबसे बड़ा झटका कार डीलरों को लगा है। अनुमान है कि देशभर के डीलरों को करीब ₹2500 करोड़ का सीधा नुकसान हो सकता है।

क्यों हो रहा है डीलरों को नुकसान?

दरअसल, डीलरों ने त्योहारी सीजन की बिक्री को देखते हुए पहले ही कंपनियों से बड़ी मात्रा में गाड़ियां स्टॉक कर ली थीं। लेकिन ये गाड़ियां उन्हें पुरानी जीएसटी दरों और सेस के हिसाब से खरीदनी पड़ीं। अब जबकि जीएसटी 2.0 लागू हो गया है और नई दरें लागू हो चुकी हैं, तो वही गाड़ियां ग्राहकों को पुरानी कीमतों पर बेच पाना मुश्किल हो गया है।

इस वजह से डीलरों को मजबूरी में अपनी जेब से भारी छूट देनी पड़ रही है। शोरूम मैनेजर्स का कहना है कि हर गाड़ी पर उन्हें ₹30,000 से ₹40,000 तक का नेट लॉस उठाना पड़ रहा है।

खाली पड़े शोरूम, ग्राहकों की नई मांगें

देशभर के कई शोरूम्स में ग्राहकों की आवाजाही तो बढ़ी है, लेकिन वे नई दरों पर छूट की उम्मीद कर रहे हैं। दक्षिण दिल्ली स्थित एक हुंडई शोरूम के मैनेजर ने बताया कि वे ग्राहकों को दो अलग-अलग कीमतें बता रहे हैं – 22 सितंबर से पहले की दर और बाद की दर। लेकिन ग्राहक केवल नई दरों के आधार पर खरीदना चाहते हैं।

मारुति नेक्सा शोरूम के मैनेजर ने कहा कि पिछले चार सालों में बिक्री का यह सबसे खराब OND (अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर) सीजन हो सकता है। ग्राहक यह तर्क दे रहे हैं कि जब ऑटो पार्ट्स पर टैक्स कम हो गया है तो कार की कीमतें और घटनी चाहिए।

महिंद्रा शोरूम की स्थिति अलग

महिंद्रा डीलरशिप में स्थिति कुछ अलग दिखी। यहां ग्राहक मुस्लिम और सिख परिवारों से आए, जबकि हिंदू खरीदार ‘श्राद्ध’ के चलते परहेज कर रहे हैं। मैनेजर ने बताया कि उनके पास 277 बिना बिकी कारें पड़ी हैं। चूंकि महिंद्रा की ज्यादातर कारों में 1200 सीसी से ऊपर के इंजन हैं, इसलिए जीएसटी कटौती का असर उनकी गाड़ियों पर उतना नहीं पड़ा।

FADA ने सरकार से लगाई गुहार

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कहा है कि डीलरों के पास अभी भी बड़ी मात्रा में वैध Compensation Cess का क्रेडिट पड़ा हुआ है। लेकिन अब जब सेस खत्म हो गया है, तो यह क्रेडिट न तो CGST, SGST या IGST के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही इसका रिफंड मिल रहा है।

FADA ने चेतावनी दी है कि अगर इस मुद्दे पर संक्रमणकालीन व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो यह रकम डीलरों के लिए स्थायी नुकसान बन जाएगी और एमएसएमई डीलरशिप की वर्किंग कैपिटल पर गंभीर असर डालेगी।

सरकार भी है चिंतित

सोमवार को हुई एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में GST 2.0 के Transitional Issues पर चर्चा की गई। सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि डीलरों के पहले से चुकाए गए सेस को कैसे एडजस्ट किया जाए, क्योंकि कई गाड़ियां पहले ही फैक्ट्री से निकल चुकी हैं लेकिन उनकी बिक्री नई दरों के लागू होने के बाद होनी है।

नई टैक्स दरें क्या हैं?

  • छोटी कारें (1200 सीसी तक पेट्रोल, 1500 सीसी तक डीजल और लंबाई 4 मीटर से कम) → अब 18% जीएसटी स्लैब में (पहले 28% + सेस)।
  • बड़ी कारें (1200/1500 सीसी से ज्यादा इंजन या लंबाई 4 मीटर से अधिक) → अब 40% टैक्स (पहले 28% + सेस)।
  • सभी ऑटो पार्ट्स → अब 18% जीएसटी (पहले कई पार्ट्स पर 28%)।

ऑटो सेक्टर पर प्रभाव

नई टैक्स दरों से ग्राहकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन डीलरों की हालत खराब है। कई डीलर पुराना स्टॉक खत्म होने तक नई गाड़ियां खरीदने से बच रहे हैं। इससे वाहन निर्माताओं (OEMs) पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में बिक्री धीरे-धीरे स्थिर हो सकती है, लेकिन फिलहाल डीलरों को भारी वित्तीय दबाव झेलना पड़ रहा है।

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