जशपुर ज़िले में एक आदिवासी परिवार के चार सदस्यों की निर्मम हत्या और लाशों को घर के भीतर छुपाना, केवल एक जघन्य अपराध नहीं बल्कि भाजपा शासन का असली क्रूर चेहरा सामने लाता है।
भाजपा की सोच में न आदिवासी समाज की गरिमा है, न सुरक्षा। डबल इंजन की सरकार आदिवासियों की उपेक्षा ही नहीं करती, बल्कि उनके अस्तित्व और अधिकारों से भी परेशान दिखाई देती है।
अगर ऐसा नहीं होता, तो प्रशासन उन्हें सुरक्षा देने में असमर्थ क्यों रहा? न्यायिक कार्रवाई में इतना विलंब क्यों हुआ?
भाजपा शासन में आदिवासी जीवन की कोई कीमत शेष नहीं बची है। यह केवल जशपुर की नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की करुण पुकार है।



