भारत की ब्लू इकोनॉमी को बूस्ट, यूरोपीय संघ ने खोले निर्यात के दरवाजे

Madhya Bharat Desk
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भारत के समुद्री उत्पाद निर्यातकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। यूरोपीय संघ (EU) ने 102 नई भारतीय फिशरीज यूनिट्स को निर्यात के लिए मंजूरी दे दी है। वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि इस फैसले के बाद यूरोपीय संघ भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा गंतव्य बन जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, इस निर्णय से भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात में करीब 20% की वृद्धि होने की संभावना है। वर्तमान में भारत हर साल लगभग 1.1 बिलियन डॉलर के समुद्री उत्पाद यूरोपीय संघ को निर्यात करता है।

श्रिम्प मार्केट को मिलेगा बड़ा सहारा

भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात मुख्य रूप से श्रिम्प (झींगा) पर निर्भर करता है। लेकिन हाल ही में अमेरिका ने 50% टैरिफ लगाकर भारतीय श्रिम्प बाजार पर दबाव बढ़ा दिया था। ऐसे में यूरोपीय संघ के नए फैसले को भारत के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को न केवल अपने निर्यात बाजार को विविधता देने में मदद मिलेगी, बल्कि नई यूनिट्स को वैश्विक मानकों पर काम करने और बेहतर उत्पादन के लिए प्रेरणा भी मिलेगी।

निर्यातकों की उम्मीदें बढ़ीं

मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूती देगा और देश के मछली पालन उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

यह फैसला भारत की मछली पालन और समुद्री उत्पाद उद्योग को नई ऊर्जा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निर्यात वृद्धि का अनुमान सही साबित होता है तो भारत अगले दो वर्षों में एशिया के शीर्ष समुद्री उत्पाद निर्यातकों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

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