नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली एक बार फिर किसानों के आक्रोश का गवाह बनने जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की ओर से जंतर-मंतर पर आयोजित किसान महापंचायत के लिए देशभर से किसानों का जमावड़ा शुरू हो गया है। इस महापंचायत का सबसे बड़ा मुद्दा सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी है।
किसानों की मुख्य मांगें
किसान महापंचायत में एमएसपी की गारंटी के साथ-साथ यह मांग भी उठाई जाएगी कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन क्षेत्रों को अमेरिका के साथ किसी भी प्रस्तावित समझौते से बाहर रखा जाए। इसके अलावा कृषि कानूनों (अब निरस्त) के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने पर भी चर्चा होगी।
SKM का दावा, आंदोलन रहेगा शांतिपूर्ण
संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ किया है कि यह महापंचायत पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी और किसानों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है। यह महापंचायत उस बड़े आंदोलन के लगभग चार साल बाद हो रही है, जब हजारों किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ डेरा डाल रखा था।
सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में करीब 1,200 जवानों की तैनाती की है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जा रही है।
पहले भी लंबे समय तक धरने पर बैठे थे किसान
पंजाब और हरियाणा के किसान लंबे समय तक शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे रहे थे। यहां किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने चार महीने से ज्यादा का अनशन किया था। केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन एमएसपी पर कानून बनाने को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने डल्लेवाल को “सच्चा किसान” बताते हुए उनकी सराहना की थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि हाईवे देश की जीवनरेखा हैं और उन्हें ब्लॉक करना सही नहीं है। साथ ही इशारा किया था कि कुछ लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए आंदोलन को लंबा खींचना चाहते हैं।







