बिहार। वोटर लिस्ट में एक महिला की उम्र 124 साल दर्ज होने से अजीबोगरीब स्थिति बन गई है। मीता देवी नाम की महिला ने बताया कि उन्होंने पहली बार अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाया था, लेकिन जब वोटर आईडी में जन्मतिथि देखी तो चौंक गईं—उनका जन्म वर्ष 1900 लिखा हुआ था, जबकि असल जन्मतिथि 15 जुलाई 1990 है।
मीता देवी ने कहा, “हमने तो आधार कार्ड के अनुसार सही जानकारी दी थी, लेकिन टाइपिंग की गलती से हमारी उम्र 124 साल दिखा दी गई। चुनाव आयोग ने हमें दादी बना दिया, तो अब कुछ फायदा भी मिलना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि आवेदन उन्होंने साइबर कैफ़े से करवाया था और ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया उन्हें याद नहीं है। नाम पहली बार वोटर लिस्ट में आया है, लेकिन गलती के चलते मामला चर्चा का विषय बन गया है।
इस घटना के बाद संसद में भी मीता देवी के नाम की टी-शर्ट पहनकर विरोध किया गया। विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और डेटा एंट्री की सटीकता को लेकर आंदोलन कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गलतियों से बचने के लिए जरूरी है:
- जवाबदेही तय करना: गलती करने वाले कर्मचारी को चेतावनी और दोहराने पर सख्त कार्रवाई।
- प्रशिक्षण व जागरूकता: डेटा एंट्री के महत्व पर कर्मचारियों को नियमित ट्रेनिंग।
- दोहरी जांच प्रणाली: फाइनल डेटा कम से कम दो लोगों द्वारा चेक किया जाए।
- तकनीकी सुधार: फॉर्म में जन्मतिथि के लिए तार्किक सीमा (1900 से कम या वर्तमान वर्ष से अधिक न हो) तय हो।
- काम का बोझ कम करना: जल्दबाजी और दबाव में होने वाली गलतियों से बचना।
अगर ये कदम उठाए जाएं तो भविष्य में कोई और “124 साल के वोटर” वाली गलती नहीं होगी।







