नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि भारत में अल्पसंख्यकों को जो सम्मान, अधिकार और सुरक्षा प्राप्त है, वह इस देश की बहुसंख्यक समाज की सहनशीलता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रमाण है। उन्होंने खुद को उदाहरण बनाते हुए कहा कि वे भी एक अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं और अगर वे पाकिस्तान या बांग्लादेश में होते तो शायद उन्हें शरणार्थी बनकर जीवन बिताना पड़ता।
रिजिजू ने कहा कि भारत की धर्मनिरपेक्षता सिर्फ संविधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहां की संस्कृति और सोच में रची-बसी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत में अल्पसंख्यक पूरी तरह से स्वतंत्र हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की असुरक्षा महसूस नहीं होती। यह सब इसीलिए संभव हो पाया है क्योंकि भारत में बहुसंख्यक हिंदू समाज मूलतः सहिष्णु और लोकतांत्रिक मूल्यों को मानने वाला है।
कांग्रेस पर सीधा हमला:
उन्होंने कांग्रेस और वामपंथी सोच रखने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग देश के भीतर यह झूठा प्रचार करते हैं कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने इस तरह की बयानबाज़ी को देश की छवि को नुक़सान पहुँचाने वाला बताया और कहा कि भारत जैसे विविधता भरे लोकतंत्र में इस प्रकार की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है।
अल्पसंख्यकों के लिए विशेष योजनाएं:
रिजिजू ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाएं सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ योजनाएं विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को ध्यान में रखकर चलाई जाती हैं, जिससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले छह मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक समुदायों के लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं।
ओवैसी का तीखा जवाब:
रिजिजू के इन बयानों पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि हम भारत के नागरिक हैं, किसी राजा के दया पर जीने वाले प्रजा नहीं। उन्होंने कहा कि हमारे अधिकार संविधान से प्राप्त हैं और हम इन्हें छोड़ने वाले नहीं। ओवैसी ने कहा कि भारत की तुलना पाकिस्तान या श्रीलंका जैसे विफल देशों से करना गलत है।
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि वे और उनकी पार्टी भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और संविधान में विश्वास रखते हैं, और किसी भी कीमत पर अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।



