नई दिल्ली:कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में छत्तीसगढ़, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों को लेकर चुनाव आयोग और भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें इन नतीजों में साजिश की बू आ रही है और चुनाव आयोग की भूमिका संदिग्ध लग रही है।
राहुल गांधी की पृष्ठभूमि और अनुभव:
राहुल गांधी ने कहा:
“मैं एक राजनीतिक परिवार में जन्मा हूँ। 1980 में जब मैं और प्रियंका छोटे थे, तब हम घर में लेई बनाते थे और रात में निकलकर पोस्टर चिपकाते थे।”
उन्होंने दावा किया कि पिछले 30 वर्षों से वे चुनाव लड़ रहे हैं, और उन्हें पोलिंग प्रक्रिया, बूथ प्रबंधन, वोटर लिस्ट, फॉर्म 17 आदि की गहरी समझ है।
चुनाव नतीजों पर गंभीर सवाल:
राहुल गांधी ने हाल के चुनाव परिणामों पर गहरा संदेह जताया:
- “जहां हमारे रोड शो हुए, वहां हजारों की भीड़ थी लेकिन मतदान में वोट नहीं मिले। ये असंभव है।”
- “2018 में मध्यप्रदेश में हमारी सरकार बनी थी, लेकिन उसे चोरी कर लिया गया।”
- “2023 की भारत जोड़ो यात्रा में मैंने भयंकर जनविरोध देखा, लेकिन हमें सिर्फ 65 सीटें मिलीं, ये मुमकिन ही नहीं।”
- “महाराष्ट्र में पहली बार हमें पुख्ता सबूत मिले।”
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप:
राहुल गांधी ने बताया कि महाराष्ट्र चुनाव के बाद जब उन्हें संदेह हुआ, तो गठबंधन के सभी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट और वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की।
“चुनाव आयोग ने इनकार कर दिया।”
“क्या चुनाव आयोग ही चुनाव चुराने में मदद कर रहा है?”
“क्या वह बीजेपी का पक्ष ले रहा है?”
मीडिया और आम जनता की भूमिका:
राहुल गांधी ने मीडिया को भी आड़े हाथों लिया:
“मीडिया ने इन सवालों को दबा दिया और इसे ‘विजय रथ’ बना कर दिखाना ज्यादा आसान और फायदे का सौदा समझा।”
जबकि हकीकत में पर्दे के पीछे कई सवाल दम तोड़ रहे थे।
सवाल जो लोकतंत्र पर छाया डालते हैं:
- क्या चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता खो चुका है?
- क्या चुनाव आयोग अब स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं रहा?
- क्या एक संवैधानिक संस्था को तानाशाही रवैया अपनाना चाहिए?
राहुल गांधी ने इन सवालों को नई हिम्मत और जवाबदेही की मांग के साथ उठाया है।



