महिला आरक्षण पर संग्राम: “संविधान और सामाजिक न्याय के खिलाफ थी बीजेपी की मंशा”— कमलनाथ

Madhya Bharat Desk
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भोपाल से आई राजनीतिक बयानबाज़ी ने एक बार फिर महिला आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय बहस को गर्म कर दिया है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा सिर्फ महिलाओं के अधिकारों का सवाल नहीं, बल्कि संविधान और सामाजिक संतुलन से जुड़ा विषय है।

कमलनाथ ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर ऐसा ढांचा लाना चाहती थी, जिससे वास्तविक सशक्तिकरण के बजाय संविधान की मूल भावना को नुकसान पहुंचे। उनका आरोप है कि प्रस्तावित व्यवस्था में OBC, SC-ST वर्गों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही थी, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

उन्होंने कांग्रेस के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी शुरू से ही महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने के पक्ष में रही है। इस दिशा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा पंचायत और नगर निकाय स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने की पहल को उन्होंने ऐतिहासिक कदम बताया। कमलनाथ के मुताबिक, वही सोच आज भी कांग्रेस की नीतियों में दिखाई देती है।

बीजेपी पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन (Delimitation) के जरिए दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और छोटे राज्यों के साथ अन्याय की आशंका थी। उनका दावा है कि यह कदम देश के संघीय ढांचे को कमजोर कर सकता था।

कमलनाथ ने विपक्ष की एकजुटता का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अन्य दलों के साथ मिलकर ऐसे विधेयक को चुनौती दी, जो उनके अनुसार असंवैधानिक था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सिर्फ विरोध करने की नहीं, बल्कि संविधान की रक्षा करने की भी होती है।

इस पूरे घटनाक्रम में उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की जनता उनके इस कदम को लंबे समय तक याद रखेगी।

राजनीतिक गलियारों में यह बयान एक नई बहस को जन्म दे चुका है क्या महिला आरक्षण वाकई सशक्तिकरण का माध्यम है या फिर इसके पीछे राजनीतिक रणनीतियां काम कर रही हैं? आने वाले समय में यह मुद्दा और तेज़ होने की संभावना है।

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