भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का कहना है कि दावों और आपत्तियों की अवधि शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक किसी भी राजनीतिक दल द्वारा SIR (Systematic Voter List Revision) प्रक्रिया के तहत एक भी दावा या आपत्ति दर्ज नहीं की गई है।
संसद में विरोध, पर चुनावी प्रक्रिया पर मौन
जहां सांसद संसद के भीतर तीखे विरोध और नारेबाजी में व्यस्त हैं,
वहीं वे मतदाता सूची के शुद्धिकरण जैसे मूलभूत लोकतांत्रिक कर्तव्य में पूरी तरह असफल रहे हैं।
यह स्थिति न केवल राजनीतिक प्राथमिकताओं की दिशा पर सवाल उठाती है,
बल्कि यह भी दिखाती है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है।
चुनावी पवित्रता बनाम राजनीतिक दिखावा
संसद में कानून निर्माण और रचनात्मक बहस जरूरी हैं,
लेकिन उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी चुनावी व्यवस्था की शुचिता बनाए रखना भी है।
SIR प्रक्रिया से बोगस वोटर्स हटते हैं, और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाता है —
फिर भी नेताओं की इस पर चुप्पी बताती है कि कहीं सिर्फ प्रदर्शन रह गया है, लोकतंत्र की आत्मा नहीं।



