भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर और अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला जल्द ही अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूर्ण कर 14 जुलाई को पृथ्वी पर वापसी करेंगे। Axiom-4 मिशन के तहत उन्हें और अन्य तीन सदस्यों को 25 जून को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से रवाना किया गया था। 28 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून को उनका यान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से जुड़ गया था।
Axiom-4 मिशन की प्रमुख जानकारी
नासा के वाणिज्यिक क्रू प्रोग्राम के निदेशक स्टीव स्टिच ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि “हम शुभांशु और उनकी टीम के मिशन पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। 14 जुलाई को उन्हें ISS से पृथ्वी पर लाने की योजना पर काम चल रहा है।”
कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
- जन्म: 10 अक्टूबर 1985, लखनऊ
- शिक्षा: सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, लखनऊ से स्कूली पढ़ाई
- परिवार: मूल निवासी संडीला (हरदोई), पत्नी डॉ. कामना (डेंटिस्ट), एक बेटा कियास
- उपनाम: गुंजन
- कैरियर शुरुआत: 2003 में NDA में चयन, 2006 में वायुसेना में फाइटर पायलट
- अनुभव: लगभग 2000 घंटे की उड़ान, SU-30 MKI, मिग-29, जगुआर समेत कई विमानों का अनुभव
- 2024: गगनयान मिशन के लिए चुने गए 4 अंतरिक्ष यात्रियों में एक
गगनयान से Axiom-4 तक का सफर
2019 में शुभांशु को भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन “गगनयान” के लिए ट्रेनिंग के लिए रूस भेजा गया था। मॉस्को स्थित गागरिन ट्रेनिंग सेंटर में उन्हें शून्य गुरुत्व, स्पेसक्राफ्ट ऑपरेशन और आपातकालीन हालात से निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु स्थित इसरो केंद्र में भी परीक्षण और अभ्यास किया।
Axiom मिशन में चयन कैसे हुआ?
ISRO और NASA की साझेदारी में Axiom Space Inc. द्वारा आयोजित मिशन में शुभांशु को प्रमुख अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया। उनके साथ ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर को बैकअप के रूप में शामिल किया गया। बैकअप अंतरिक्ष यात्री की भूमिका किसी आकस्मिक स्थिति में मुख्य यात्री को बदलने की होती है।







