नई दिल्ली। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए न केवल मोर्चा खोला है, बल्कि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक पकड़ को भी चुनौती दे रहा है। ब्रिक्स (BRICS) ने अपनी अलग करेंसी लाने से फिलहाल इंकार किया है, लेकिन भारत ने ब्रिक्स देशों के साथ सीधे रुपए में व्यापार करने का बड़ा फैसला किया है।
रुपए में ट्रेड से अमेरिका पर दबाव
भारत अगर अपने निर्यात से 100 मिलियन डॉलर बचा लेता है, तो अमेरिकी टैरिफ से होने वाला नुकसान न केवल पूरा हो जाएगा, बल्कि भारत को फायदा भी मिलेगा। चीन और रूस समेत ब्रिक्स के अन्य देश भारत के साथ रुपए में व्यापार करने के लिए तैयार हैं। इससे डॉलर पर निर्भरता घटेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
चीन और रूस भारत के साथ
भारत की इस रणनीति को चीन और रूस का समर्थन मिल चुका है। दोनों देश डॉलर को दरकिनार कर सीधे रुपए में लेन-देन करने पर सहमत हो गए हैं। ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों ने भी संकेत दिए हैं कि वे भारत की इस पहल का समर्थन करेंगे।
अमेरिकी दबदबे को बड़ी चुनौती
अब तक अमेरिकी डॉलर ही वैश्विक व्यापार का आधार रहा है, जिससे अमेरिका पूरी दुनिया पर आर्थिक दबदबा बनाए हुए था। लेकिन भारत ने इस व्यवस्था को चुनौती देकर एक नया विकल्प पेश किया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति अमेरिका की दादागीरी को कमजोर कर सकती है।
ट्रंप की बढ़ती बेचैनी
भारत के इस कदम से ट्रंप प्रशासन की टेंशन और बढ़ गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच भारत का डॉलर के बजाय रुपए में ट्रेड करना अमेरिका के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में ट्रंप की बौखलाहट और बढ़ सकती है।







