रायपुर।छत्तीसगढ़ के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव डॉ. भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर लगे कथित शोषण और वेतन से रकम ट्रांसफर कराने के आरोपों का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। विश्वविद्यालय की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक मामला दर्ज नहीं होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस मुख्यालय का दरवाजा खटखटाया है।
विश्वविद्यालय ने डीजीपी अरुण देव गौतम को ऑनलाइन शिकायत भेजकर मोहन नगर थाना प्रभारी (TI) और संबंधित सीएसपी की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि सभी जरूरी दस्तावेज और जांच रिपोर्ट सौंपने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
हालांकि, इस मामले में दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल ने द लेंस से कहा कि शिकायत की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।
कार्रवाई में देरी पर विश्वविद्यालय ने उठाए सवाल
विश्वविद्यालय का कहना है कि तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस को कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भेज दी गई थी। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज करने के बजाय जांच की प्रक्रिया लगातार लंबी खिंच रही है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का आरोप है कि इस दौरान कुलसचिव और उनके परिवार की ओर से शिकायतकर्ता महिला पर दबाव बनाने की कोशिश भी की गई। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई, लेकिन पीड़िता को जरूरी सुरक्षा नहीं मिल सकी। विश्वविद्यालय का यह भी दावा है कि बाद में महिला का एक और बयान दर्ज किया गया, जो फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सामने दिए गए बयान से अलग था।
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पुलिस ने मांगी और जानकारी
उधर, एसएसपी कार्यालय से आवेदन मोहन नगर थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर कुछ अतिरिक्त जानकारियां मांगी हैं।
पुलिस ने शिकायतकर्ता का विस्तृत बयान, आरोपों का पूरा ब्योरा, संबंधित दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। पत्र में कहा गया है कि इन दस्तावेजों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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कमेटी ने आरोपों को माना प्रथम दृष्टया सही
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने महिला कर्मचारी की शिकायत, शपथपत्र, बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना था।
इसके बाद विश्वविद्यालय ने पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को विस्तृत जांच रिपोर्ट, बैंक रिकॉर्ड, फोनपे ट्रांजेक्शन, शपथपत्र और अन्य दस्तावेज भेजते हुए कुलसचिव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।





