रायपुर।छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश में अधिकारी शिकायतों पर कार्रवाई करना तो दूर, शिकायतकर्ता के बात तक सुनने से बच रहे हैं।
एक शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजे गए पत्रों के बावजूद अधिकारियों से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता भ्रष्टाचार और शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे जैसे गंभीर मामलों को लेकर शिकायत करने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव के पास पहुंचा था लेकिन काफी समय तक इंतज़ार के बावजूद अधिकारी मिला नहीं।
मामला अरपा भैन्साझार परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और मंदिर हसौद स्थित मिवान स्टील प्लांट प्रा. लि. द्वारा शासकीय भूमि पर कथित कब्जे से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री को अरपा भैन्साझार परियोजना में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था। इसके बाद 7 सितंबर को परियोजना में आरोपित कीर्तिमान राठौर पर कार्रवाई के संबंध में भी पत्र प्रेषित किया गया।


इसी तरह, 4 जुलाई 2026 को मुख्य सचिव को मिवान स्टील प्लांट प्रा. लि. द्वारा शासकीय भूमि पर किए गए कथित कब्जे के संबंध में पत्र भेजे जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन गंभीर विषयों पर कार्रवाई की अपेक्षा से उन्होंने संबंधित अधिकारी से मुलाकात का समय मांगा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
छत्तीसगढ़ में तंत्र इतना भ्रष्ट हो चुका है कि प्रशासनिक अधिकारी भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर सुनवाई और कार्रवाई से बच रहे हैं तथा शिकायतकर्ता की बात तक सुनने को तैयार नहीं हैं।






