पुणे।सॉफ्टवेयर जगत की दिग्गज कंपनी Persistent के संस्थापक आनंद देशपांडे हाल ही में अरबपतियों की क्लब में शामिल हो गए हैं। 18 देशों में फैले 53 ऑफिस और 15 हजार से ज्यादा कर्मचारियों वाली इस कंपनी की खासियत सिर्फ इसका कारोबार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रति इसका समर्पण भी है।
कंपनी ने हाल ही में अपने नए कार्यालय का उद्घाटन पूर्ण हिंदू विधि-विधान के साथ किया। सत्यनारायण की पूजा के बाद ही इस ऑफिस में ‘गृह प्रवेश’ हुआ। हैरानी की बात यह है कि एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी होने के बावजूद यहाँ पश्चिमी त्योहारों की जगह भारतीय परंपराओं को अहमियत दी जाती है।
टावरों के नाम वेदों पर, दीवारों पर श्लोक
पुणे के हिंजवड़ी इलाके में स्थित कंपनी के मुख्य कार्यालय के चार टावरों के नाम चारों वेदों ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के नाम पर रखे गए हैं। नल स्टॉप के पास वाले ऑफिस के दो टावर प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों पिंगल और आर्यभट्ट को समर्पित हैं, जबकि सेनापति बापट रोड स्थित इमारत ‘भगीरथ’ कहलाती है। ऑफिस की दीवारों पर जगह-जगह वेदों से जुड़े संदर्भ भी देखे जा सकते हैं।
छुट्टियां भी भारतीय त्योहारों पर
कंपनी की छुट्टी नीति भी अनोखी है। यहाँ 1 जनवरी या क्रिसमस पर ऑफिस खुला रहता है, लेकिन गुड़ी पड़वा, गणेश चतुर्थी और गणेश विसर्जन जैसे पारंपरिक त्योहारों पर पूरी तरह से छुट्टी दी जाती है। महिला कर्मचारी हल्दी-कुमकुम जैसे उत्सव भी बड़े उत्साह से मनाती हैं।
कर्मचारी नहीं, परिवार के सदस्य
यहाँ काम करने वाले लोगों को केवल ‘कर्मचारी’ नहीं, बल्कि ‘Persistent परिवार का सदस्य’ माना जाता है। पिछली तिमाही में कंपनी का राजस्व 1491 करोड़ रुपये रहा। सादा जीवन और उच्च विचारों वाले आनंद देशपांडे ने साबित कर दिया है कि ग्लोबल बिजनेस और भारतीय संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।





