नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE के री-इवैल्यूएशन और उत्तरपुस्तिका देखने के लिए बनाया गया ऑनलाइन पोर्टल पिछले कई दिनों से ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसकी वजह से देशभर के लाखों छात्र और उनके अभिभावक परेशान हैं। रिजल्ट जारी होने के करीब 6 दिन बाद भी पोर्टल पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाया है।
बोर्ड ने 29 मई को री-इवैल्यूएशन से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन शुरुआत से ही वेबसाइट में तकनीकी दिक्कतें सामने आने लगीं। छात्रों को अपनी आंसर शीट डाउनलोड करने, आवेदन करने और रिकॉर्ड चेक करने में काफी परेशानी हो रही है। बोर्ड की तरफ से कई बार “अनऑथराइज्ड एक्सेस” यानी हैकिंग जैसी कोशिशों का कारण बताया गया, लेकिन समस्या अभी तक पूरी तरह हल नहीं हुई है।
इसी बीच छात्रों और कुछ विशेषज्ञों ने कई तरह की शिकायतें और आरोप भी लगाए हैं—
- कुछ छात्रों का कहना है कि उन्हें जो कॉपी डाउनलोड हुई, वह उनकी नहीं थी। दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने भी ऐसा ही दावा किया है।
- कई छात्रों ने शिकायत की है कि अपलोड की गई कॉपियां बहुत धुंधली हैं, जिससे उत्तर पढ़ना मुश्किल हो रहा है।
- रांची के एक छात्र और टेक रिसर्चर सार्थक सिद्धांत ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नियमों में बदलाव कर किसी एक कंपनी को फायदा पहुंचाया गया।
- साइबर सुरक्षा और डेटा से जुड़ी व्यवस्था पर भी विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
वहीं CBSE ने कुछ बातों को स्वीकार किया है। बोर्ड का कहना है कि तकनीकी खराबी की वजह से कुछ मामलों में गलत कॉपियां अपलोड हो गई थीं। धुंधली कॉपियों की समस्या को भी माना गया है और बाद में स्कैनिंग सिस्टम में सुधार करने की बात कही गई है।
टेंडर और अन्य आरोपों पर बोर्ड का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार की गई है। साथ ही डिजिटल सिस्टम में आई दिक्कतों की जांच के लिए आईआईटी मद्रास और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों से रिपोर्ट भी मांगी गई है।
री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में हो रही देरी की वजह से छात्रों की चिंता बढ़ गई है। कई छात्रों का कहना है कि कॉलेज एडमिशन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बड़े शिक्षा बोर्डों में शामिल CBSE को अपने डिजिटल सिस्टम और साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि आगे ऐसी समस्याएं दोबारा न हों।




