देश के गांवों के विकास को रफ्तार देने के लिए इस बार ग्रामीण निकायों को मिलने वाला अनुदान ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय वित्त आयोग ने करीब 4.35 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड फंड पंचायतों को दिया है, जो पिछली बार के 2.36 लाख करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है। इससे गांवों की तस्वीर बदलने और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि यह बड़ा फैसला पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन से प्रेरित बताया।
उन्होंने जानकारी दी कि इस अनुदान में से 87 हजार करोड़ रुपये पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने के लिए तय किए गए हैं। अगर कोई ग्राम पंचायत या जिला परिषद अपनी आय में कम से कम 2.5% की वृद्धि करती है, तो उसे अतिरिक्त फंड भी मिलेगा। इससे स्थानीय निकायों को खुद के संसाधन बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।
महिला सशक्तिकरण के बीच ‘प्रधान-पति’ प्रथा पर भी सरकार सख्त नजर आ रही है। देशभर में लगभग 25 लाख पंचायत प्रतिनिधियों में करीब 14 लाख महिलाएं हैं, लेकिन कई जगहों पर अब भी उनके स्थान पर उनके पति निर्णय लेते दिखते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए एक कमेटी बनाई गई है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर राज्यों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जाएंगे।
उत्तर और दक्षिण भारत की पंचायतों के कामकाज में अंतर पर भी सचिव ने बात रखी। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के राज्य आय सृजन के मामले में आगे हैं। उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश ने संपत्ति कर से 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा और कर्नाटक ने करीब 1350 करोड़ रुपये जुटाए हैं। उनका कहना है कि पंचायतों को आय बढ़ाने को विकास के मुद्दे के रूप में देखना होगा, न कि सिर्फ चुनावी नजरिए से।
वहीं, ‘स्वामित्व योजना’ के तहत भी बड़ी प्रगति देखने को मिली है। करीब 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे का काम पूरा हो चुका है और नक्शे राज्य सरकारों को सौंप दिए गए हैं। इससे ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार मिलने का रास्ता साफ होगा।
डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में भी पंचायतें तेजी से आगे बढ़ रही हैं। देश की 2.55 लाख ग्राम पंचायतें ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से जुड़ चुकी हैं, जहां योजनाओं से लेकर खर्च और ऑडिट तक की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती है। साथ ही ‘मेरी पंचायत’ ऐप के जरिए आम नागरिक भी खर्च की जानकारी आसानी से देख सकते हैं, जिसे अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं।



