मणिपुर में मई 2023 से भड़की जातीय हिंसा का असर अब भी लोगों की ज़िंदगी पर भारी पड़ रहा है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 58,821 लोग अपने ही घरों से बेघर हो चुके हैं, जबकि 217 लोगों की जान इस हिंसा में जा चुकी है। ये जानकारी राज्य के गृह विभाग ने एक आरटीआई के जवाब में दी है, जो 3 मई 2023 से लेकर 30 मार्च 2026 तक के हालात को दर्शाती है।
हिंसा की वजह से हजारों परिवार आज भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। 10 मार्च 2026 तक राज्य में कुल 174 राहत शिविर चल रहे हैं, जहां विस्थापित लोग किसी तरह अपनी ज़िंदगी गुजार रहे हैं। सरकार ने पुनर्वास के लिए 3,000 प्री-फैब्रिकेटेड घर भी तैयार करवाए हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं।
अगर नुकसान की बात करें तो तस्वीर और भी दर्दनाक हो जाती है—करीब 7,894 पक्के घर पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि 2,646 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के टूटे सपनों की कहानी है।
इस बीच, कांग्रेस नेता हरेश्वर गोस्वामी ने बताया कि ये जानकारी हासिल करने में उन्हें करीब सात महीने का समय लगा, जो प्रशासनिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को भी उजागर करता है।
उधर, चुराचांदपुर जिले में भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे की मौत को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। न्याय की मांग को लेकर बुधवार को 13 घंटे का पूर्ण बंद बुलाया गया। सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस बंद में बाजार, स्कूल, दफ्तर और परिवहन सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं।
जोमी समन्वय समिति के आह्वान पर हुए इस बंद को कुकी और हमार संगठनों का भी समर्थन मिला। वाल्टे, जो मई 2023 में भीड़ के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे, उन्होंने 20 फरवरी 2026 को गुरुग्राम के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। उनके निधन को 60 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराज़गी है।
हालांकि बंद के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण रही और केवल एम्बुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं को ही अनुमति दी गई। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा।



