नई दिल्ली: देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती फिर सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के कई कुख्यात आतंकी अपनी असली पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही वजह है कि इन्हें ट्रैक करना एजेंसियों के लिए बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 57 आतंकियों के लगभग 200 अलग-अलग नाम दर्ज किए गए हैं। इन नामों में दाऊद इब्राहिम, हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो लंबे समय से भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
बताया गया है कि ये आतंकी सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों नामों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय और भारतीय एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। उदाहरण के तौर पर, मुंबई हमलों का मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम अकेले 22 अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
इसी तरह, लश्कर-ए-ताइबा के सरगना हाफिज सईद के 9 नाम दर्ज हैं, जबकि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े शीर्ष आतंकी मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर 11 अलग-अलग नामों से पहचाने जाते हैं।
गृह मंत्रालय द्वारा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत तैयार की गई इस सूची में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट बताती है कि मसूद अजहर भी कई नामों का इस्तेमाल करता है, जिनमें मौलाना महमूद मसूद अजहर अलवी और विला अदाम इस्सा जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा, रियाज इस्माइल शाहबंदर, इब्राहिम मेनन, सैयद मोहम्मद युसूफ शाह जैसे आतंकियों ने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए कई नाम रखे हुए हैं। कुछ के तो 5 से लेकर 10 तक अलग-अलग नाम एजेंसियों के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नाम बदलने की यह रणनीति आतंकियों को लंबे समय तक बचने में मदद करती है और जांच प्रक्रिया को जटिल बना देती है। यही वजह है कि अब एजेंसियां इनकी पहचान और नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए और ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही हैं।



