यह सच है कि कई मौकों पर, राहुल गांधी ने ऐसे मुद्दे उठाए हैं जिन पर उनकी पार्टी के भीतर सर्वसम्मति नहीं थी या उन पर अलग-अलग राय थी. “डेड इकोनॉमी” (यानी, भारत की अर्थव्यवस्था की धीमी गति) का मुद्दा भी इसी तरह का है.
राहुल गांधी के प्रमुख मुद्दे जिन पर उन्हें अपनी पार्टी का पूरा समर्थन नहीं मिला:
राफेल विमान सौदा: राहुल गांधी ने राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए “चौकीदार चोर है” का नारा दिया था. हालांकि, पार्टी के भीतर कई नेताओं ने इस रणनीति पर सवाल उठाए थे और उन्हें लगा था कि यह मुद्दा मतदाताओं के साथ जुड़ नहीं पा रहा है.
अनिल अंबानी और गौतम अडानी: राहुल गांधी लगातार इन दोनों उद्योगपतियों पर हमला करते रहे हैं. उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इन उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है. पार्टी के भीतर कुछ नेताओं ने इस व्यक्तिगत हमले वाली रणनीति के बजाय संस्थागत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी.
जाति जनगणना (OBC): राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जाति जनगणना का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे जाति जनगणना कराएंगे. इस मुद्दे पर भी पार्टी के भीतर कुछ नेताओं ने असहमति जताई थी, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे समाज में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है.
राहुल गांधी के इन मुद्दों को उठाने के पीछे यह विचार रहा है कि वे कांग्रेस को एक ऐसी पार्टी के तौर पर स्थापित करें जो गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के लिए लड़ती है. हालांकि, उनकी यह रणनीति पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के लिए सहज नहीं रही है, जो अधिक ‘मध्यमार्गी’ राजनीति पसंद करते हैं. इस वजह से, अक्सर ऐसा लगता है कि वे अपनी ही पार्टी में इन मुद्दों पर अकेले हैं.







