सुकमा।आंध्र प्रदेश सरकार ने पोलावरम प्रोजेक्ट को जून 2027 तक पहले चरण में पूरा करने की तैयारी तेज कर दी है। वेलगापुड़ी सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को हर हाल में तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। आंध्र सरकार 2027 में होने वाले गोदावरी पुष्करालु से पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लाभ राज्य की जनता को देना चाहती है।
पोलावरम प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ने के साथ ही छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के अंतिम छोर पर बसे कोंटा नगर पंचायत और आसपास के 18 गांवों में चिंता बढ़ गई है। साल 2018 में हुए प्राथमिक सर्वे के मुताबिक, कोंटा नगर पंचायत सहित इन 18 गांवों के डूब क्षेत्र में आने की आशंका जताई गई थी। इससे करीब 15 हजार लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी।
हालांकि, परियोजना के कारण छत्तीसगढ़ में जलमग्न होने वाली जमीन, जंगल और निजी संपत्तियों का मौजूदा और सटीक आंकड़ा अभी भी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय प्रशासन के पास भी इस संबंध में अद्यतन जानकारी नहीं होने की बात सामने आ रही है।
वहीं, समीक्षा बैठक में निर्माण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना से जुड़ा पूरा तकनीकी प्लान सौंपा। योजना के अनुसार 1398 मीटर लंबी नई डायाफ्राम वॉल का निर्माण किया जाना है। यदि इसका काम जनवरी से शुरू होता है तो इसे पूरा करने में करीब एक साल का समय लग सकता है।
ऐसे में पोलावरम प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ने के साथ छत्तीसगढ़ के कोंटा और आसपास के गांवों में डूब क्षेत्र को लेकर चिंता भी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों की नजर अब परियोजना की अद्यतन सर्वे रिपोर्ट और प्रभावित क्षेत्रों को लेकर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।







