147 साल पुरानी रजिस्टर्ड डाक सेवा हुई बंद, अब सिर्फ स्पीड पोस्ट से ही पहुंचेगा हर पत्र

Madhya Bharat Desk
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भारत की डाक सेवाओं के इतिहास का एक अहम अध्याय अब बंद हो गया। 1877 में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई रजिस्टर्ड डाक सेवा का आज, 30 सितंबर को आखिरी दिन है। एक अक्तूबर से पूरे देश में केवल स्पीड पोस्ट के जरिए ही पत्र और दस्तावेज पहुंचाए जाएंगे।

कभी सुरक्षित और भरोसेमंद माध्यम मानी जाने वाली यह सेवा अदालतों से लेकर आम जनता तक के लिए वर्षों तक सबसे पसंदीदा रही। कानूनी दस्तावेज, अहम चिट्ठियां और व्यक्तिगत संदेश पहुंचाने के लिए इसे पूरी तरह विश्वसनीय माना जाता था। हालांकि आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए इस कदम से डाक व्यवस्था और तेज़ हो जाएगी, लेकिन एक सस्ती और पुरानी परंपरा का अंत भी हो गया।

प्रवर डाक अधीक्षक सचिन चौबे ने बताया कि अब उपभोक्ता स्पीड पोस्ट का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसमें थोड़ा अतिरिक्त खर्च जरूर है, लेकिन इसकी सुविधाएं आधुनिक और सुरक्षित हैं। मात्र 5 रुपये अतिरिक्त भुगतान पर प्रेषण पर्ची मिलेगी और साथ ही ओटीपी आधारित डिलीवरी का लाभ भी उठाया जा सकेगा। वजन और दूरी के हिसाब से नई दरें तय की गई हैं।

 स्पीड पोस्ट की प्रमुख विशेषताएं

  • दस्तावेजों की सुरक्षित और ट्रैकिंग के साथ डिलीवरी
  • हर प्रकार के सरकारी कार्यों में कानूनी मान्यता
  • ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में आसान उपलब्धता
  • 5 रुपये अतिरिक्त पर प्रेषण पर्ची का विकल्प

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