छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना में कथित गड़बड़ियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को रायपुर समेत 7 जिलों के 18 निजी अस्पतालों में एक साथ दबिश दी गई। जांच इतनी गोपनीय रखी गई कि टीमों को जिले में पहुंचने के बाद ही संबंधित अस्पताल का नाम बताया गया, ताकि अस्पताल प्रबंधन को पहले से तैयारी का मौका न मिले।
रायपुर के एक अस्पताल में निरीक्षण के दौरान दूसरे जिलों के 44 मरीज भर्ती मिले, लेकिन न तो डॉक्टर मौजूद थे और न ही स्टाफ उनके इलाज की जरूरी जानकारी दे सका। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि छापे से दो दिन पहले इसी अस्पताल से ओडिशा के 31 मरीजों को एक साथ थोक में डिस्चार्ज किया गया था, जिनके दस्तावेज भी टीम को नहीं सौंपे गए।
स्वास्थ्य विभाग की माने तो आयुष्मान योजना में फर्जी भर्ती, ओवर-बिलिंग और दस्तावेजों में अनियमितता की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं, जिसके मद्देनजर 52 अधिकारियों की 17 अलग-अलग टीमें बनाकर यह कार्रवाई की गई। जांच का दायरा रायपुर के 7, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2 और सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल तक रहा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने कुछ अस्पतालों को “वेरी हाई रिस्क” श्रेणी में चिह्नित किया था, जिसके आधार पर राज्य स्तरीय जांच दल ने कार्रवाई की। जांच दल ने अस्पतालों से उपचार रिकॉर्ड, बिलिंग विवरण और आयुष्मान क्लेम से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। इससे पहले, जांच दल की अनुशंसा पर रायपुर के मेडलाइफ सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल और लोटस हास्पिटल एंड एडवांस यूरोलाजी सेंटर का आयुष्मान पंजीयन निरस्त किया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़िया लोगों को लूटने वालों का हश्र यही होगा, लेकिन विभाग ने आधिकारिक तौर पर अभी किसी अस्पताल पर धांधली साबित होने की घोषणा नहीं की है।





