छत्तीसगढ़ी पहचान, भाषा और अस्मिता को मजबूत करने के उद्देश्य से निकली “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा” का आज डंगानिया, चम्पारण, जौंदी-जोका, पौंड और मन्दलोर गांवों में भव्य स्वागत किया गया। रथ यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जनजागरण का अभियान चलाया गया, जिसे ग्रामीणों का व्यापक समर्थन मिला।
रथ यात्रा के विचारों से प्रभावित होकर एक हजार से अधिक किसान, जवान और महिलाओं ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान डंगानिया, चम्पारण, पौंड और मन्दलोर में जनसभाओं का आयोजन भी किया गया।
सभाओं को संबोधित करते हुए राज्य आंदोलनकारी एवं रथ यात्रा प्रभारी श्री लालाराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण राज्य निर्माण संग्राम सेनानियों के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जैसे छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिला, उसी तरह अब शोषणमुक्त छत्तीसगढ़िया राज्य की स्थापना, छत्तीसगढ़ी महतारी की अस्मिता की रक्षा और भाषा-संस्कृति को सम्मान दिलाने का संकल्प लिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर शोषण करने वालों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा और छत्तीसगढ़िया समाज अपने हक और सम्मान की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेगा।
“सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज” की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि बाहरी शोषक छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़िया समाज का शोषण बंद करें, अन्यथा छत्तीसगढ़ छोड़ने के लिए तैयार रहें। संगठन ने सभी छत्तीसगढ़िया भाई-बहनों से अपील की कि वे पार्टीबंदी और जातिबंदी से ऊपर उठकर एकजुट हों।
सभा के दौरान यह नारा भी दिया गया—
“जाति-पाति की करो विदाई, सब छत्तीसगढ़िया भाई-भाई”
इस मौके पर आदिवासी किसान नेता अशोक कश्यप, बृजबिहारी साहू और मोहन देवांगन ने भी सभा को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का आह्वान किया।



