बजट सत्र से पहले सरकार पर विपक्ष का बड़ा वार, आख़िरी पल का एजेंडा बताकर उठाए सवाल

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। संसद के आगामी बजट सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर सत्र के अंतिम क्षणों में विधेयक लाकर विपक्ष को चौंकाने की रणनीति अपना रही है, जिसे उन्होंने “सस्पेंस एंड स्टन” तरीका बताया।

सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि सरकार सत्र की कार्यसूची पहले से साझा नहीं करती, जिससे विपक्ष को तैयारी का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मौकों पर सदस्यों को अधूरे या खाली दस्तावेज तक थमा दिए जाते हैं, जो संसदीय मर्यादा और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े करता है।

विदेश नीति और अर्थव्यवस्था पर चर्चा की मांग

बैठक में जॉन ब्रिटास ने बदलते वैश्विक हालात का हवाला देते हुए भारत की विदेश नीति पर संसद में विस्तृत चर्चा की आवश्यकता बताई। उन्होंने वेनेजुएला, फिलिस्तीन और ग्रीनलैंड से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की।

इसके अलावा विपक्ष ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर और मनरेगा के बजट में संभावित कटौती को लेकर भी चिंता जताई।

क्षेत्रीय दलों ने उठाए स्थानीय मुद्दे

सर्वदलीय बैठक में क्षेत्रीय दलों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं सामने रखीं। बीजू जनता दल (BJD) ने ओडिशा में किसानों की बदहाल स्थिति और फसल बीमा भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा उठाया।

वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आई-पैक (IPAC) से जुड़े मामले में हुई छापेमारी को लेकर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। साथ ही यूजीसी से संबंधित विवाद और बढ़ते जातिगत तनाव जैसे विषयों को भी संसद में उठाने की बात कही गई।

सरकार ने दिया सहयोग का भरोसा

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार सभी दलों के सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बजट सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार संवाद और सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ेगी।

28 जनवरी से शुरू होगा बजट सत्र

गौरतलब है कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से आरंभ होगा। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस सर्वदलीय बैठक में सत्र की कार्ययोजना और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करेगा।

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