छत्तीसगढ़ में बढ़ते कुत्ता हमले: आवारा कुत्तों से नागरिकों में दहशत, सख़्त नीति की उठी मांग

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आमजन, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, सड़कों पर कुत्तों के हमलों से भयभीत हैं। इसके बावजूद शासन और प्रशासन की उदासीनता से जनता में गहरी नाराजगी है।

समस्याओं पर समाधान की पांच बड़ी मांगें

  1. काटे गए पीड़ितों को मुआवज़ा:
    कुत्ते के काटने के मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता दी जाए। इससे पीड़ितों को राहत मिलेगी और शासन की जवाबदेही भी तय होगी।
  2. सड़कों पर खाना खिलाने वालों पर कार्रवाई:
    सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों को खाना देने वालों पर जुर्माना और FIR दर्ज करने की मांग की गई है। सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए यह जरूरी कदम माना जा रहा है।
  3. आवारा कुत्तों की जनगणना और टीकाकरण:
    कुत्तों की संख्या की गणना और नियमित वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने की मांग उठाई गई है, जिससे भविष्य में काटने की घटनाओं पर लगाम लग सके।
  4. टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर की व्यवस्था:
    नागरिकों को शिकायत दर्ज करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराया जाए ताकि समस्या की जानकारी तत्काल जिम्मेदार विभाग तक पहुंचे।
  5. एबीसी (ABC) नियमों में बदलाव:
    एनीमल बर्थ कंट्रोल नियमों की समीक्षा और संशोधन की मांग की जा रही है ताकि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए कानून में जरूरी बदलाव हो सकें।

क्यों ज़रूरी है सख़्त नीति?

यह सवाल वाजिब है कि जब कबूतरों को दाना डालने पर कार्रवाई हो सकती है, तो सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर सख्ती क्यों नहीं? यह नीति में समानता और निष्पक्षता की मांग करता है।

आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और हमलों की घटनाएं केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पशु कल्याण दोनों का गंभीर विषय हैं।

समाधान की दिशा में जरूरी समन्वय

इस गंभीर समस्या के हल के लिए सरकार, सामाजिक संगठनों और पशु कल्याण संस्थाओं के बीच तालमेल जरूरी है। एक ऐसी नीति बननी चाहिए जो इंसानों की सुरक्षा और कुत्तों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण दोनों का संतुलन बनाए रखे।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment