छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस और प्रदेश के 25वें वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रायपुर आगमन को लेकर प्रदेश के लगभग 1,80,000 शिक्षक एलबी संवर्ग ने अपने संगठन “छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ” के माध्यम से एक खुला निवेदन पत्र जारी किया है। इस पत्र में शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए अपनी प्रमुख समस्याओं और लंबित मांगों को विस्तारपूर्वक रखा है।
संघ ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की प्रगति और भारत की विश्व स्तर पर मजबूत स्थिति के लिए शुभकामनाएँ दीं, साथ ही यह भी उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ के शिक्षक वर्ग की समस्याओं का भी समाधान शीघ्र होगा। संगठन ने पत्र में उल्लेख किया कि प्रदेश के शिक्षक एलबी संवर्ग, जो अधिकतर किसान, मजदूर और ग्रामीण परिवारों से आते हैं, बीते 25 वर्षों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। उन्होंने कई बार आंदोलन और हड़ताल के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुँचाई, किंतु अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगति का समाधान, क्रमोन्नत वेतनमान का लागू होना, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, हालिया युक्तिकरण (rationalization) को निरस्त करना और शिक्षकों पर लगे ट्रांसफर बैन को हटाना शामिल हैं। संघ का कहना है कि यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें पूरा किया जाता है, तो यह न केवल शिक्षकों के जीवन में स्थिरता लाएगा बल्कि प्रदेश के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू, उपाध्यक्ष वीरेंद्र साहू, सचिव राजेंद्र लाड़ेकर, महासचिव भोजराम साहू और प्रवक्ता नरेंद्र तिवारी ने संयुक्त रूप से इस पत्र को तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा किया। संगठन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि वे शिक्षकों की इन जायज़ मांगों पर सकारात्मक पहल करें, जिससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों को न्याय मिल सके।







