बिलासपुर की राजनीति इन दिनों गर्मा गई है। विपक्षी दलों ने यहाँ एक बड़ी रैली का आयोजन किया, जिसे ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ सभा का नाम दिया गया। इस सभा में लगभग 25,000 लोगों की भीड़ जुटने का दावा किया गया है। आयोजकों का कहना है कि जनता का गुस्सा साफ झलक रहा है और इसी ऊर्जा को वे सियासी ताक़त में बदलना चाहते हैं।
इस शक्ति-प्रदर्शन में कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी देखने को मिलेगी। खासतौर पर सचिन पायलट समेत कई वरिष्ठ नेता इस मंच को साझा करेंगे। इससे साफ है कि विपक्ष इस रैली के ज़रिए जनता तक अपना संदेश पहुँचाने और राज्य सरकार पर सीधा हमला करने की रणनीति बना रहा है।
दूसरी ओर, डिप्टी सीएम ने इस सभा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि विपक्ष जनता को गुमराह करने और झूठ के सहारे अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार विकास के एजेंडे पर काम कर रही है और जनता झूठ व प्रचार की राजनीति में अब भरोसा नहीं करती।
यह रैली सिर्फ भीड़ जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आने वाले चुनावी माहौल की एक झलक माना जा रहा है। जहाँ एक तरफ विपक्ष जनता की नाराज़गी को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सत्तापक्ष इस सभा को एक ‘नाटक’ बताकर जनता के सामने अपनी उपलब्धियों को गिनाने पर जोर देगा।
इस तरह, बिलासपुर की यह सभा आने वाले दिनों में राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा देगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसके दावे पर विश्वास करती है—विपक्ष के आंदोलनकारी नारों पर या सरकार के विकास के वादों पर।







