रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो साल पूरे होते-होते पार्टी के भीतर अब तक का सबसे बड़ा और खुला टकराव सामने आ गया है। रायपुर सांसद और भाजपा के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी ही सरकार और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मामला अब बिलासपुर हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और इसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।
यह विवाद सिर्फ पद या अधिकार का नहीं, बल्कि करीब 15 करोड़ रुपये के कथित फर्जी टेंडर, काम पहले कराने और बाद में टेंडर जारी करने तथा सरकारी धन के संदिग्ध लेन-देन से जुड़ा है जिसको पहली बार मध्य भारत परिदृश्य ने उजागर किया था। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया है।
बृजमोहन अग्रवाल भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, छत्तीसगढ़ के पांच वर्षों के निर्वाचित अध्यक्ष हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सहमति से शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को एक सरकारी आदेश के जरिए राज्य स्काउट–गाइड परिषद का पदेन अध्यक्ष बना दिया गया। बृजमोहन अग्रवाल का साफ कहना है कि वे निर्वाचित अध्यक्ष हैं और संगठन के संविधान के अनुसार जब तक वे स्वयं इस्तीफा नहीं देते, तब तक कोई उन्हें इस पद से नहीं हटा सकता। जानकारों का भी मानना है कि एक निर्वाचित अध्यक्ष के ऊपर सरकारी आदेश से पदेन अध्यक्ष बैठाना नियमों के खिलाफ है, जिसकी वैधानिकता अब हाई कोर्ट तय करेगा।

विवाद की जड़ राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी है। पहले यह आयोजन नया रायपुर में प्रस्तावित था, लेकिन बाद में अचानक इसे बालोद स्थानांतरित कर दिया गया। आरोप है कि जंबूरी से जुड़े करीब 15 करोड़ रुपये के काम पहले ही करा लिए गए और उसके बाद टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। इतना ही नहीं, राज्य शासन से मिली 10 करोड़ रुपये की राशि स्काउट–गाइड के खाते में जमा करने के बजाय बालोद जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में डाल दी गई। टेंडर से पहले काम शुरू होने की तस्वीरें सामने आने के बाद बृजमोहन अग्रवाल के आरोप और मजबूत हो गए।

अनियमितताओं के आरोप सामने आते ही बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली निर्वाचित परिषद ने जंबूरी स्थगित करने का फैसला लिया। लेकिन इसके तुरंत बाद सरकार इसके खिलाफ खड़ी नजर आई। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष नियुक्त किया गया और राज्य आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि जंबूरी स्थगित नहीं हुई है और आयोजन होगा। इस तरह निर्वाचित अध्यक्ष के फैसले को खुलेआम नकार दिया गया, जिससे संगठन और सरकार के बीच टकराव और गहरा गया।

इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भी राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री ने जंबूरी को लेकर X पर लिखा कि राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी का आयोजन राज्य के लिए गर्व की बात है, लेकिन कुछ ही देर बाद यह पोस्ट डिलीट कर दी गई। इसे लेकर चर्चा है कि क्या मुख्यमंत्री को पूरी जानकारी नहीं दी गई थी या फिर सरकार के भीतर ही किसी ने उन्हें भ्रम में रखा।

अब बृजमोहन अग्रवाल ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की है कि गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष के पद से हटाया जाए और 9 जनवरी यानी आज से प्रस्तावित जंबूरी पर रोक लगाई जाए। इस याचिका में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को भी पक्षकार बनाया गया है। कानूनी लड़ाई के साथ-साथ यह मामला राजनीतिक तौर पर भी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
भाजपा की इस अंदरूनी लड़ाई ने विपक्षी कांग्रेस को हमला बोलने का खुला मौका दे दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा अब गुटों में बंट चुकी है और जंबूरी का आयोजन भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया है। पार्टी ने EOW में शिकायत दर्ज कराई है और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग भी की है।
पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि भ्रष्टाचार के आरोप कोई विपक्षी नेता नहीं, बल्कि भाजपा का ही एक वरिष्ठ सांसद लगा रहा है। दस्तावेजों, नियमों और सामने आई तस्वीरों के आधार पर बृजमोहन अग्रवाल का रुख आक्रामक और मजबूत नजर आ रहा है। अब सबकी नजरें हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, लेकिन इतना तय है कि बृजमोहन अग्रवाल बनाम गजेंद्र यादव की यह लड़ाई आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में लंबी बहस छेड़ेगी।



