2028 विधानसभा चुनाव पर भाजपा की नजर: संगठन-सत्ता के बीच बढ़ेगी तालमेल

Madhya Bharat Desk
5 Min Read

रायपुर। 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सत्ता और संगठन के बीच जो दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है, उसे समय रहते कम करना जरूरी है। इसी वजह से संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व ने संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच फीडबैक जुटाने के लिए अपने स्तर पर पड़ताल कराई। इसमें यह बात सामने आई कि सरकार और संगठन के बीच अपेक्षित तालमेल नहीं दिख रहा है। विपक्ष भी लगातार आरोप लगा रहा है कि भाजपा के कई कार्यकर्ता और संगठन से जुड़े लोग खुद को सत्ता से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं कई जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते नजर आए हैं।

सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों में भी कई जगह जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। विपक्ष इन घटनाओं को सोशल मीडिया पर मुद्दा बनाकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। इसे देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने स्थिति को गंभीरता से लिया है और अभी से आगामी चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया है।

सूत्र बताते हैं कि कई ऐसे वरिष्ठ नेता, जिन्हें सत्ता या संगठन में अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिली है, उनके बीच असंतोष की भावना है। इसके पीछे क्षेत्रीय मांगों की अनदेखी या निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी न मिलना जैसे कारण बताए जा रहे हैं। कई बार यह नाराजगी सार्वजनिक मंचों पर भी दिखाई दी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ भाजपा का आधार सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व की लोकप्रियता पर नहीं टिका है, बल्कि कई क्षेत्रीय नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं की मजबूत पकड़ भी पार्टी की ताकत है। ऐसे में यदि इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर नहीं चला गया तो भविष्य में इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।

इसी दिशा में पहला कदम उठाते हुए भाजपा ने निगम-मंडलों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के साथ संवाद शुरू किया है। गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी योजनाओं, सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और संगठनात्मक समन्वय पर चर्चा हुई। बैठक को प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने संबोधित किया। उन्होंने पदाधिकारियों से सेवाभाव के साथ कार्य करने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अब कार्यकर्ताओं, संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का लक्ष्य तय किया जा रहा है, जिसकी नियमित समीक्षा भी संगठन स्तर पर की जाएगी।

इस पूरी कवायद के बीच सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को संतुलित करना है। लंबे समय से मेहनत कर रहे कार्यकर्ताओं को भी संगठन और सरकार में अपनी भूमिका तथा सम्मान की उम्मीद है। पार्टी नेतृत्व इस पहलू पर भी विचार कर रहा है।

वहीं मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार की छवि साफ-सुथरी मानी जाती है जो योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि कुछ अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि कुछ मध्यम स्तर के अधिकारियों का जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के साथ संवाद संतोषजनक नहीं है, जिससे अनावश्यक विवाद की स्थिति बनती है। भाजपा संगठन इस विषय को भी गंभीरता से देख रहा है क्योंकि विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ मुद्दा बना सकता है।

वहीं प्रशासनिक हलकों में भी गुटबाजी की चर्चाएं जारी हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि नौकरशाही के भीतर स्पष्ट नेतृत्व और समन्वय की कमी दिखाई देती है। इसी कारण कुछ अधिकारी अपने-अपने स्तर पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करते नजर आते हैं। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी स्पष्ट समन्वय जरूरी है, ताकि 2028 के चुनाव से पहले किसी तरह की नाराजगी या भ्रम की स्थिति न बने।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment