रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा संसद में उठाए गए औषधि परीक्षण व्यवस्था के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सांसद ने छत्तीसगढ़ में आयुष औषधियों की गुणवत्ता जांच, दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण, दवा निरीक्षकों की उपलब्धता और लाइसेंस एवं प्रमाणन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की मांग उठाई थी।
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 34 आयुष औषधि निरीक्षक कार्यरत हैं। साथ ही रायपुर में आधुनिक सुविधाओं से लैस औषधि परीक्षण प्रयोगशाला संचालित की जा रही है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि राज्य में नियामकीय व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार और संबंधित हितधारकों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ औषधीय पौधों, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा की समृद्ध विरासत वाला राज्य है। ऐसे में औषधियों की गुणवत्ता, परीक्षण व्यवस्था और नियामकीय ढांचे को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मजबूत परीक्षण प्रयोगशालाएं, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रमाणन व्यवस्था से प्रदेश के आयुर्वेदिक एवं हर्बल उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और स्थानीय उद्यमियों, लघु उद्योगों तथा औषधि निर्माताओं को भी लाभ मिलेगा।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि उनका प्रयास छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य, आयुष और औषधि गुणवत्ता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश की औषधि परीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा आयुष आधारित उद्योगों को नई पहचान मिलेगी।





