रायपुर।हसदेव अरण्य का तारा कोल ब्लॉक एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। तारा कोल ब्लॉक का आवंटन CG Syn-Gas and Chemicals Limited को किए जाने के बाद कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने भी तारा कोल ब्लॉक को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने हसदेव के जंगल, आदिवासी समाज और लेमरू एलीफेंट रिजर्व से जुड़े कई सवाल उठाए हैं।
जयराम रमेश का दावा है कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव-अरण्य में नए कोल ब्लॉक के आवंटन और नीलामी पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने जुलाई 2023 में राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे का भी जिक्र किया है।
उनके मुताबिक, अक्टूबर 2023 में केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर किया था। अब तारा ब्लॉक के आवंटन को लेकर कांग्रेस इन्हीं पुराने फैसलों का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांग रही है।
4 हजार एकड़ से ज्यादा जंगल होने का दावा
जयराम रमेश के अनुसार तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 4 हजार एकड़ से ज्यादा हिस्सा घने जंगल का है। कांग्रेस का दावा है कि खनन शुरू होने पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो सकती है।
कांग्रेस ने आशंका जताई है कि इसका असर हसदेव के जंगल, जैव विविधता और वन्यजीवों पर पड़ सकता है। लेमरू एलीफेंट रिजर्व और हाथियों के आने-जाने वाले इलाकों को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है।
जयराम रमेश ने 10 लाख से ज्यादा पेड़ों के कटने की आशंका जताई है। हालांकि, यह कांग्रेस नेता का दावा है। वास्तविक स्थिति का पता परियोजना को मिली पर्यावरणीय मंजूरियों और उनकी शर्तों के आधार पर ही चलेगा।
अडाणी कनेक्शन को लेकर भी हमला
तारा कोल ब्लॉक पाने वाली कंपनी के कारोबारी संबंधों को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश के मुताबिक, CG Syn-Gas and Chemicals Limited, Mundra Synenergy Ltd की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है और Mundra Synenergy Ltd, Adani Enterprises Ltd की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
यही कारोबारी कड़ी अब कांग्रेस के राजनीतिक हमले का प्रमुख आधार बन गई है।
फिर सियासी बहस के केंद्र में हसदेव
हसदेव अरण्य में कोयला खनन को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। जंगल, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों को लेकर यहां लगातार सवाल उठते रहे हैं। तारा कोल ब्लॉक के ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर इस मुद्दे को बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बहस में ला दिया है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे इन आरोपों और सवालों पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से क्या जवाब दिया जाता है।






