SECL खदान पर घमासान: जमीन के बदले जमीन की मांग पर अड़े ग्रामीण

Madhya Bharat Desk
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अंबिकापुर। सरगुजा के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र के मदननगर में प्रस्तावित एसईसीएल कोयला खदान का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। हाल ही में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद प्रभावित इलाके के आसपास के पांच गांवों के प्रतिनिधियों ने एक अहम बैठक की।

इस महापंचायत में ग्रामीणों ने अपना पक्ष साफ करते हुए कहा कि अगर उनकी जमीन के नीचे कोयला है तो वे गांव खाली करने को तैयार हैं, लेकिन इसके बदले प्रशासन और एसईसीएल उन्हें किसी दूसरी जगह उतनी ही उपजाऊ कृषि भूमि देकर पूरी तरह बसाए। उनका कहना है कि बिना उचित पुनर्वास के वे अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।

हालांकि, कानूनी जानकारों का कहना है कि एसईसीएल के मौजूदा भूमि अधिग्रहण नियमों में “जमीन के बदले जमीन” देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

ग्रामीणों के इस कड़े रुख के पीछे करीब 20 साल पुराना अनुभव भी है। उनका कहना है कि पास की ‘महान-3’ खदान के लिए हुए विस्थापन के दौरान कई परिवारों ने अपनी जमीन गंवा दी थी। उचित पुनर्वास नहीं मिलने के कारण कई परिवार बिखर गए और आज भी आजीविका की समस्या से जूझ रहे हैं।

ग्रामीणों का यह भी दावा है कि इलाके के करीब 37 परिवार ऐसे हैं जिनकी पूरी जमीन अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन उन्हें अब तक रोजगार नहीं मिला। इसी वजह से लोग नई खदान परियोजना को लेकर आशंकित हैं और विरोध कर रहे हैं।

विवाद उस समय बढ़ गया जब गांव में पुलिस बल के पहुंचने के बाद ग्रामीणों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हो गई। इसके विरोध में अंबिकापुर-प्रतापपुर मुख्य मार्ग पर कई घंटों तक चक्काजाम किया गया। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों और गांव के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद हालात को शांत करने की कोशिश की गई।

ग्रामीणों के मुताबिक, चर्चा के दौरान पुलिस प्रशासन ने गांव में अचानक बल प्रयोग होने की बात स्वीकार करते हुए स्थिति सामान्य करने की अपील की। इसके बाद ग्रामीणों ने भी सहयोग करते हुए जाम में फंसे वाहनों को निकलवाने में मदद की। हालांकि, अपनी जमीन और बेहतर पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीण अब भी अपने फैसले पर कायम हैं।

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