नान-घोटाले में पूर्व IAS आलोक शुक्ला की तीसरी बार ED कोर्ट में सरेंडर: सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द की

Madhya Bharat Desk
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नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले से जुड़े मामलों ने एक बार फिर सुर्खियाँ बटोरीं जब पूर्व IAS अधिकारी आलोक शुक्ला तीसरी बार कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे। यह मामला केवल एक घोटाले की जांच नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को भी दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

आलोक शुक्ला ने पहले सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया और यह आदेश दिया कि उन्हें पहले दो सप्ताह तक ED की हिरासत में रहना होगा, जिसके बाद दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। यह आदेश साफ संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और गंभीर आर्थिक अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को राहत आसानी से नहीं दी जाएगी।

कोर्ट में सरेंडर की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आलोक शुक्ला रायपुर की विशेष ED अदालत में सरेंडर करने पहुँचे। यह उनकी तीसरी कोशिश थी। लेकिन इस बार भी अदालत ने उन्हें वापस लौटा दिया। कारण यह था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित लिखित प्रति अभी अदालत में प्राप्त नहीं हुई थी। न्यायालय ने बिना दस्तावेज़ी साक्ष्य के सरेंडर को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

अगली सुनवाई की तारीख

अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है और 22 सितंबर को आलोक शुक्ला को फिर से अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। इस तारीख को संभव है कि औपचारिक रूप से उनका सरेंडर स्वीकार किया जाए और ED उन्हें हिरासत में ले।

जांच एजेंसियों की भूमिका

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) इस पूरे घोटाले की जांच कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों एजेंसियों को जांच समयसीमा में पूरी करने के लिए निर्देशित भी किया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि आरोपी को हिरासत में लेने का उद्देश्य न केवल पूछताछ करना है बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि घोटाले की परतें खुल सकें।

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