उदंती-सीतानदी में 8 साल बाद बाघिन की वापसी, जंगल के पुनर्जीवन की जगी उम्मीद

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लंबे अंतराल के बाद एक बाघिन की मौजूदगी दर्ज होने से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। हाल ही में कैमरा ट्रैप, ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो और तस्वीरों में करीब 4 वर्षीय बाघिन दिखाई दी है। वर्ष 2018 के बाद यह दूसरा अवसर है जब रिजर्व क्षेत्र में किसी बाघिन की स्पष्ट मौजूदगी सामने आई है।

वन विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीव संरक्षण, शिकार विरोधी अभियान और वन प्रबंधन को लेकर किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। अभ्यारण्य क्षेत्र में अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 900 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को मुक्त कराया गया है। साथ ही एंटी-पोचिंग कैंप, कैमरा ट्रैप निगरानी, जल स्रोतों के विकास और घासभूमि सुधार जैसे कई कदम उठाए गए हैं।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि बाघिन पिछले 11 दिनों में तीन अलग-अलग अवसरों पर कैमरा ट्रैप में कैद हुई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के उपलब्ध रिकॉर्ड में इसका कोई पूर्व डेटा नहीं मिला है, जिससे इसे क्षेत्र की नई बाघिन माना जा रहा है।

प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह बाघिन महाराष्ट्र के चंद्रपुर क्षेत्र या फिर अबूझमाड़ के जंगलों से होते हुए उदंती-सीतानदी पहुंची हो सकती है। वन विभाग इसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी जंगल में बाघ की उपस्थिति वहां के पारिस्थितिक तंत्र के स्वस्थ और संतुलित होने का संकेत होती है। बाघिन की लगातार मौजूदगी से उम्मीद जताई जा रही है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में भविष्य में बाघों की संख्या बढ़ सकती है और यह क्षेत्र एक बार फिर बाघों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में विकसित हो सकता है

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