PMGSY में टेंडर–रिवाइज खेल: करोड़ों की लूट, बड़े ठेकेदारों को सुशासन में खुली छूट

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। विष्णुदेव साय सरकार के सुशासन में PMGSY के अधिकारियों के द्वारा भारी लूट हो रही है, ऐसा आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विभाग पर आरोप है कि शासन की योजनाओं की आड़ में चुनिंदा बड़े ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए निविदा प्रक्रिया में खुली मनमानी की जा रही है, जिसे लेकर जनसामान्य में चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, PMGSY में टेंडर प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि मनचाहे ठेकेदारों को कार्य मिल सके। इसके लिए पहले कम दरों पर निविदाएं स्वीकृत कराई जाती हैं और बाद में उन्हीं कार्यों के लिए रिवाइज्ड इस्टीमेट बनाकर लागत बढ़ा दी जाती है। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों द्वारा 8 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है।

कहा जा रहा है कि इस टेंडर–रिवाइज खेल से शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी की जा रही है। घटिया निर्माण का सीधा असर ग्रामीण सड़कों की स्थिति पर पड़ रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

सूत्रों का दावा है कि विभागीय अधिकारी केके कटारे और कुछ ठेकेदारों के बीच कथित साझेदारी है। सुनील अग्रवाल (रायगढ़), सुनील अग्रवाल (बसना), एनसी नहार और कटरे जैसे ठेकेदारों के नाम चर्चा में हैं। आरोप है कि इन्हीं ठेकेदारों को ध्यान में रखकर टेंडर की शर्तें तय की जाती हैं और बाद में बिलों को रिवाइज कर दिया जाता है।

बताया जा रहा है कि PMGSY के पुराने कार्यों में हुए रिवाइज्ड इस्टीमेट को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में शिकायत दर्ज कराई गई है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में आने के बाद संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई संभव है।

हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक विभाग या शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन PMGSY के कार्यों को लेकर प्रदेशभर में असंतोष और सवाल लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

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