कलम बंद–काम बंद हड़ताल से जांजगीर-चांपा ठप, 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी सड़क पर

Madhya Bharat Desk
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जांजगीर-चांपा जिले में अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर तीन दिवसीय निश्चितकालीन कलम बंद–काम बंद आंदोलन की शुरुआत हो गई है। 11 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर जिले भर के अधिकारी और कर्मचारी सी-मार्ट परिसर में एकत्रित हुए और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले दी गई ‘मोदी की गारंटी’ अब तक पूरी नहीं हुई है।

फेडरेशन पदाधिकारियों का कहना है कि भाजपा नेताओं ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों को हल करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन सरकार बने लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो मांगों पर चर्चा हुई और न ही कोई ठोस निर्णय लिया गया। इसे कर्मचारियों ने खुली वादाखिलाफी करार दिया है।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर सरकार ने मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो राज्य फेडरेशन के साथ मिलकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस हड़ताल में जिले के अलग-अलग विभागों से 10 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।

तीन दिवसीय हड़ताल का असर जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। राजस्व विभाग, पंचायत कार्यालयों सहित अन्य शासकीय कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप है। वहीं जिला अस्पताल जांजगीर-चांपा में भी हड़ताल का सीधा असर पड़ा है, जहां ओपीडी सेवाएं तीन दिनों तक बंद रहेंगी। केवल आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी, जिससे आम मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

फेडरेशन की प्रमुख 11 सूत्रीय मांगें इस प्रकार हैं—

  • केंद्र सरकार के समान देय तिथि से कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता (DA) लागू किया जाए।
  • DA एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित की जाए।
  • सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान प्रदान किया जाए।
  • लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर कर पिंगुआ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  • प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए सभी सेवा लाभ दिए जाएं, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए।
  • सहायक शिक्षकों और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
  • नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति दी जाए।
  • अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10 प्रतिशत सीलिंग में शिथिलीकरण किया जाए।
  • प्रदेश में कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की जाए।
  • अर्जित अवकाश नगदीकरण की सीमा 300 दिवस की जाए।
  • दैनिक, अनियमित और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए ठोस नीति बनाई जाए।
  • सभी विभागों में समानता लाते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।

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