रायपुर।छत्तीसगढ़ कांग्रेस इन दिनों आंतरिक कलह की वजह से सुर्खियों में है। हाल ही में वरिष्ठ नेता चरणदास महंत के ‘चमचागिरी’ वाले बयान ने पार्टी के भीतर नई हलचल खड़ी कर दी है। इस बयान को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है।
महंत के बयान से मचा बवाल
वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणदास महंत ने हाल ही में कहा कि “कुछ लोग केवल चमचागिरी करते हैं”। इस टिप्पणी को कई कार्यकर्ताओं ने अपनी निष्ठा और मेहनत का अपमान बताया है। राजनीति में अक्सर ‘चमचा’ शब्द का इस्तेमाल चापलूसी के लिए किया जाता है, लेकिन इसे निष्ठा और समर्पण के साथ जोड़ देने से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट सकता है।
चौबे का बयान और बढ़ी गुटबाजी
इसी बीच, वरिष्ठ मंत्री रविन्द्र चौबे ने भूपेश बघेल को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने और उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कही। उनके इस सार्वजनिक बयान ने पार्टी के भीतर गुटबाजी की आशंका और गहरा दी है। जब नेता मंच से ही अपने मतभेद जाहिर करने लगते हैं, तो इससे संगठन की एकजुटता कमजोर होती है और विपक्ष को हमला करने का मौका मिलता है।
कांग्रेस के लिए बड़ा झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के विवाद कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। ऐसे मतभेद पार्टी के लिए चुनौती बन जाते हैं। इस समय कांग्रेस को एकजुट होकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है, न कि आंतरिक झगड़े सार्वजनिक करने की।
शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनौती
कांग्रेस हाईकमान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह इस विवाद को जल्द शांत करे और संगठन के भीतर एकता का संदेश दे। वरना गुटबाजी का फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है और कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है।







