सक्ति जिले के सिंघीतराई में वेदांता पावर प्लांट का बॉयलर ब्लास्ट कोई साधारण हादसा नहीं—यह भाजपा सरकार की आपराधिक लापरवाही का काला अध्याय है। कल हुई घटना में मौतें 11 से बढ़कर 19 हो चुकी हैं, 30-40 मजदूर घायल। गर्मी के तपते मौसम में तापमान बढ़ा, बॉयलर फटा, लेकिन उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ‘जांच’ की रट लगा चुप्पी साधे हैं। क्या बड़ी कंपनी के पैसे ऊपर तक पहुँच गए? मजदूरों की जिंदगियाँ सस्ती हैं क्या?
बेमेतरा पिरदा कांड: गायब रजिस्टर, दबाई सच्चाई
ठीक आज से दो साल पहले बेमेतरा के पिरदा बारूद फैक्ट्री में गर्मी के मौसम में वही त्रासदी दोहराई गई। स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड कंपनी का धमाका—8-9 मौतें पुष्टि हुईं, लेकिन उपस्थिति पत्रक आज भी गायब। कितने मरे, इसका हिसाब नहीं। घटनास्थल से 4-5 किलो शरीर के लोथड़े मिले, CCTV फुटेज डिलीट। जनप्रतिनिधियों ने पैसे लेकर पूरा मामला दबा दिया, बेमेतरा विधायक पर गुस्साई जनता ने पथराव कर दिया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने खुलेआम वादा किया था—‘स्पेशल ब्लास्ट कंपनी अब ब्लास्टिंग नहीं करेगी’—लेकिन झूठा वादा। आज भी पिरदा में ब्लास्टिंग जारी है। वेदांता में वही लापरवाही—सरकार ने कंपनी को बचाया, गरीब मजदूरों को कुर्बान कर दिया।
देवांगन की चुप्पी: अपराधी या कॉरपोरेट दलाल?
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन क्या सो रहे थे? पिरदा जैसी घटना दो साल पहले हो चुकी, गर्मी चरम पर थी—फिर भी सभी औद्योगिक इकाइयों को अलर्ट क्यों नहीं? सुरक्षा मानक हवा में, मजदूर बिना हेलमेट, बिना ट्रेनिंग। वेदांता ग्रुप ने नीचे से ऊपर तक पैसे पहुँचाए, प्रशासन ने आँखें बंद कर लीं। देवांगन अब श्रम मंत्री बनकर ‘प्रोब’ की बातें कर रहे, लेकिन पिरदा में क्या हुआ? कुछ नहीं। यह विष्णुदेव सरकार मजदूरों की नहीं, कॉरपोरेट की गुलाम है। लापरवाही से मजदूर मर रहे, सरकार मुआवजे का लॉलीपॉप लुटा रही।
कांग्रेस का तीखा प्रहार: हत्या का इल्ज़ाम
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सीधे कहा—यह हत्या है, लापरवाही भगवान भरोसे! पूर्व सीएम व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने चेतावनी दी—एंबुलेंस तक समय पर न पहुँची, सभी फैक्ट्रियाँ तुरंत चेक करो। 1 करोड़ मुआवजा दो, मंत्री इस्तीफा दें! सरकार ने 5 लाख का ऐलान किया, लेकिन देर आयी दुरुस्त आयी। विपक्ष सड़कों पर उतरने को तैयार, जनता का गुस्सा भड़क रहा। बेमेतरा की तरह वेदांता में भी आंकड़े दबाए जा रहे—कितनी मौतें असल में? सच्चाई गायब।
लापरवाही का खूनी चक्र: कब टूटेगा?
पिरदा से वेदांता तक साफ है—सरकार जानबूझकर सुरक्षा की अनदेखी कर रही। गर्मी में बॉयलर चेकिंग क्यों नहीं? ऑडिट क्यों नहीं? मजदूर यूनियनें हड़ताल की तैयारी में। विष्णुदेव सरकार कॉरपोरेट चमची बनी बैठी—गरीब मरें, अमीर बचें



