रायपुर। भर्ती वर्ष 2018 के अभ्यर्थियों का धरना अब दो महीने पूरे कर चुका है, लेकिन नियुक्ति की मांग आज भी अधूरी है। धरनास्थल पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले सात वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और अब नई सरकार से उन्हें उम्मीद है।
धरने के दौरान अभ्यर्थियों की चार बार प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात हो चुकी है। पहली मुलाकात में मंत्री ने कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है और इस पर आगे बातचीत की जाएगी। दूसरी बार उन्होंने स्वीकार किया कि भर्ती प्रक्रिया पिछली सरकार के कार्यकाल की थी और सत्ता परिवर्तन के बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलना “अन्याय” है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
हालांकि, इन आश्वासनों को अब दो महीने बीत चुके हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे हर मंत्री और विधायक के दरवाज़े पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समाधान अब भी दूर है।
कोर्ट केस का क्या है सच?
अभ्यर्थियों के मुताबिक, प्रशासन बार-बार “कोर्ट केस” का हवाला देता है। उनका कहना है कि वर्ष 2019 में पहली याचिका दायर की गई थी, जिसमें अदालत ने प्रशासन से जवाब मांगा था, लेकिन निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद 2020 में दूसरी याचिका दायर हुई, जिसका फैसला 2023 में आया।
फैसला उस समय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा की पीठ ने दिया था। अभ्यर्थियों का कहना है कि अदालत ने प्रशासन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर निर्णय दिया।
प्रशासन ने अदालत को बताया कि 28 अगस्त 2018 को मेरिट सूची और प्रतीक्षा सूची जारी हुई थी और 27 अगस्त 2019 को उसकी वैधता समाप्त हो गई। लेकिन अभ्यर्थियों का सवाल है—यदि मेरिट सूची की वैधता ही एक वर्ष थी, तो प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवार उससे पहले अदालत कैसे जाते?
वे एक उदाहरण देते हैं कि एक अभ्यर्थी को फरवरी 2019 में मेडिकल के लिए बुलाया गया और नवंबर 2019 में उसने नियुक्ति न लेने का पत्र दिया। अभ्यर्थियों का दावा है कि इससे स्पष्ट है कि प्रक्रिया एक वर्ष से आगे तक चली।
13(2) नियम और खाली पदों का सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती नियमों के तहत यदि प्रक्रिया के दौरान किसी पद पर मृत्यु या पदोन्नति के कारण रिक्ति आती है तो प्रतीक्षा सूची से 25% तक उम्मीदवारों को लिया जा सकता है। उनका आरोप है कि रिक्त पद होने के बावजूद प्रतीक्षा सूची से किसी को नियुक्त नहीं किया गया।
उनका मानना है कि पिछली सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि यदि पद खाली थे तो नियुक्ति क्यों नहीं हुई।
‘नियुक्ति मिले बिना नहीं हटेंगे’
धरनास्थल पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं हो जाता। उनका कहना है कि यह उनकी आजीविका और सम्मान का सवाल है।
“हमें सिर्फ हमारा अधिकार चाहिए। अगर सरकार कहती है कि यह हमारा अधिकार है, तो फिर हमें तारीख भी बताए कि न्याय कब मिलेगा,” एक अभ्यर्थी ने कहा।
नई सरकार से उम्मीद लगाए बैठे ये युवा कहते हैं कि वे देश सेवा और परिवार के पालन-पोषण के लिए नौकरी चाहते हैं, और अब समाधान ही उनके आंदोलन का अंत होगा।









