मध्य प्रदेश की राजनीति में बजट को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक कमलनाथ ने राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को “जनता से विश्वासघात” करार दिया है।
राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कमलनाथ ने कहा कि यह बजट “बातों का पुलिंदा” है, जिसमें ज़मीनी हकीकत और जनहित के मुद्दे नदारद हैं। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले किए गए बड़े वादों को सरकार ने पूरी तरह भुला दिया है।
चुनावी वादों का क्या हुआ?
कमलनाथ ने याद दिलाया कि नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की जनता से चार प्रमुख वादे किए थे—
- किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल
- गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये प्रति क्विंटल
- लाड़ली बहन योजना के तहत महिलाओं को 3000 रुपये प्रतिमाह
- घरेलू गैस सिलेंडर 450 रुपये में उपलब्ध कराने का वादा
उन्होंने कहा कि बजट भाषण में इन वादों का कहीं उल्लेख तक नहीं किया गया, जिससे साफ़ होता है कि सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है।
पुराने वादों पर भी चुप्पी
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि पिछले बजट में की गई घोषणाओं की स्थिति पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कई योजनाएं अब तक अधूरी हैं, लेकिन सरकार ने उनके क्रियान्वयन पर कोई ठोस रिपोर्ट पेश नहीं की।
केंद्र से कम होती हिस्सेदारी पर चिंता
कमलनाथ ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से अगले पांच वर्षों में करों की हिस्सेदारी में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की संभावित कमी पर राज्य सरकार की रणनीति क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया।
इसके अलावा केंद्र-राज्य की साझी योजनाओं में भी इस वित्त वर्ष के दौरान अपेक्षित राशि का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे कई विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
“जनहित से ज्यादा केंद्र की राजनीति?”
कमलनाथ का आरोप है कि राज्य सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा करने में असफल रही है और केंद्र के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश के किसानों, महिलाओं, युवाओं और आम वर्गों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़कों दोनों जगह गर्मा सकता है।







