जबलपुर में खाद्य विभाग से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले राशन में से लगभग 2.20 करोड़ रुपये मूल्य का अनाज गायब पाया गया। इस मामले की जांच के बाद 4 खाद्य विभाग के अधिकारियों समेत कुल 33 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है। PDS योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक अनाज पहुँचाने के लिए बनाई गई है, लेकिन जब इसमें शामिल अधिकारी और व्यापारी ही धांधली करने लगें तो गरीबों का हक उनसे छिन जाता है। इस घोटाले के कारण हजारों परिवारों को निर्धारित राशन नहीं मिल पाया।
पुलिस और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आया है कि राशन की हेरा-फेरी लंबे समय से चल रही थी। अधिकारियों की मिलीभगत से गोदामों से अनाज बाहर निकाला गया और बाजार में ऊँचे दाम पर बेच दिया गया। यह घोटाला उजागर होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की और दोषियों पर मामला दर्ज किया।
यह घटना सरकार और समाज दोनों के लिए चेतावनी है। पारदर्शिता और ईमानदारी के बिना कोई भी जनकल्याणकारी योजना सफल नहीं हो सकती। जरूरत है कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि गरीबों को उनका हक सही तरीके से मिल सके और भ्रष्टाचार करने वालों पर कड़ी सजा हो।







