साय कैबिनेट के 3 बड़े फैसले, गांवों की तस्वीर बदलने की तैयारी

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक समाप्त हो गई। बैठक में ग्रामीण विकास, रोजगार, आजीविका और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

1. ग्रामीणों को 125 दिन रोजगार की गारंटी

कैबिनेट ने “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़” के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी।

योजना के जरिए जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास और आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा। साथ ही ग्राम पंचायतों के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का बेहतर समन्वय किया जाएगा। पारदर्शिता और निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल होगा।

इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में खर्च वहन करेंगे। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 4,000 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

2. “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना को भी हरी झंडी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना शुरू करने का फैसला लिया है।

इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हथकरघा, बुनाई-सिलाई और हस्तशिल्प जैसे सृजन केंद्र, दलहन, तिलहन, राइस मिल और डेयरी जैसी प्रसंस्करण इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत और डिजिटल सेवाओं से जुड़े सेवा केंद्र, साथ ही विपणन और आपूर्ति केंद्र विकसित किए जाएंगे।

योजना का मकसद स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।

3. कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026 को मंजूरी

कैबिनेट ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026” के प्रारूप को भी मंजूरी दे दी है।

नई नीति के तहत कृषि अवशेष, नगरीय ठोस कचरा, पशुओं के अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इससे कचरा प्रबंधन बेहतर होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा और जैविक उर्वरक उत्पादन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में हर साल करीब 5 लाख टन CBG उत्पादन की संभावना है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य की नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि ऊर्जा विभाग आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करेगा।

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