रायपुर।छत्तीसगढ़ी अस्मिता और पहचान को लेकर शुरू की गई “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा” को गांव-गांव से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकली यह यात्रा अपने 15वें दिन सैकड़ों गांवों का भ्रमण करते हुए शतक का आंकड़ा पार कर चुकी है।
आज रथ यात्रा ने कुहरी, बांसकुड़ा, बांसकुड़ा-2, बिरबिरा, जलकी, छपोराडीह, मालीडीह, पिरदा, फुसेराडीह और लंहगर गांवों में गली-गली भ्रमण किया। जैसे ही रथ गांवों में पहुंचा, “छत्तीसगढ़ी महतारी की जय” और “सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज जिंदाबाद” के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।
रथ यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ी महतारी की वंदना, साथ ही लोकप्रिय कवि-गीतकार स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया के जागरण गीतों ने लोगों को भावविभोर कर दिया। गांवों में महिलाओं, किसानों और युवाओं ने रथ की आरती उतारकर स्वागत किया और बड़ी संख्या में संगठन की सदस्यता भी ग्रहण की।

जनसभा में उठी अस्मिता और अधिकारों की आवाज
गांव-गांव आयोजित सभाओं को राज्य निर्माण संग्राम सेनानी लालाराम वर्मा, छन्नूलाल साहू, अशोक कश्यप, नंदकुमार साहू, बलराम साहू, राधा बाई सिन्हा, श्यामा बाई ध्रुव, धनेश्वर यादव, टुकेश्वरी ध्रुव, लोक कलाकार लक्ष्मी निषाद, वृजकिशोरी साहू और जनकूराम साहू ने संबोधित किया।
रथ यात्रा के प्रभारी और किसान नेता लालाराम वर्मा ने कहा कि
“छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों के शोषण के खिलाफ, छत्तीसगढ़ी महतारी की अस्मिता, इतिहास और संस्कृति के अपमान का जवाब देने के लिए अब पार्टी और जाति से ऊपर उठकर एकजुट होना जरूरी है। सामूहिक संघर्ष से ही छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति की रक्षा संभव है।”
जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन
इसी क्रम में महासमुंद जिले में सत्याग्रही किसान जनदर्शन में जिलाधीश कार्यालय पहुंचे और छत्तीसगढ़ी महतारी की जप्ती से जुड़े मामले में दंडाधिकारी जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।






