छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालात ऐसे नजर आ रहे हैं कि अब अस्पताल जैसे संवेदनशील और जनसेवा से जुड़े संस्थान भी विवाद और दबंगई से अछूते नहीं रह गए हैं। मुंगेली जिले के लोरमी स्थित 50 बिस्तर वाले शासकीय अस्पताल में डॉक्टरों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला सामने आया है।
खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. गजेन्द्र सिंह दाऊ की शिकायत पर लोरमी थाना पुलिस ने अजय टंडन, दुर्गेश टंडन और आकाश टंडन समेत अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार मुख्य आरोपी अजय टंडन, जो खुद को निजी एम्बुलेंस चालक बताता है, लंबे समय से अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए प्रभावित करता था। आरोप है कि मरीजों को सरकारी अस्पताल से डिस्चार्ज कराने के लिए डराने, भ्रमित करने और विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देने का प्रयास किया जाता था, जिसके बदले निजी अस्पतालों से कमीशन मिलने की बात भी शिकायत में कही गई है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोपी कथित रूप से निजी एम्बुलेंस लेकर अस्पताल परिसर में पहुंचा। सुरक्षाकर्मी द्वारा रोकने पर विवाद बढ़ गया और अस्पताल स्टाफ के सामने गाली-गलौज तथा अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की गईं तथा वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान कर्मचारियों को धमकियां भी दी गईं।
बीएमओ की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग पहले भी कई बार अस्पताल परिसर में अनुचित गतिविधियों में शामिल रहे हैं। यहां तक कि महिला स्टाफ नर्सों के आवासीय कमरों में बिना अनुमति प्रवेश करने और शासकीय दस्तावेजों व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति क्या होगी? सरकारी अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं कानून का भय कम होने और व्यवस्था पर बढ़ते दबाव की ओर संकेत करती हैं।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में स्वास्थ्य संस्थानों की गरिमा और सुरक्षा बनी रह सके।





