नई दिल्ली। जिस उपलब्धि को कभी पश्चिमी मीडिया ने भारत के लिए मुश्किल बताया था, उसे आखिरकार DRDO के वैज्ञानिकों ने सच कर दिखाया है। करीब 10 साल की लगातार मेहनत के बाद भारत ने स्वदेशी ‘घोस्ट’ लॉन्ग रेंज लैंड अटैक मिसाइल तैयार कर ली है।
यह कोई साधारण मिसाइल नहीं, बल्कि लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली घातक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर बताई जा रही है। यानी जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान का लगभग पूरा इलाका और चीन के तिब्बत में मौजूद कई सैन्य ठिकाने इसकी जद में होंगे।

इस मिसाइल को ‘घोस्ट’ नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इसे रोकना बेहद मुश्किल माना जा रहा है। यह जमीन से करीब 100 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरती है और सीधे रास्ते पर नहीं चलती, बल्कि जिग-जैग तरीके से आगे बढ़ती है। यही वजह है कि दुश्मन के रडार के लिए इसे पकड़ना बेहद कठिन माना जा रहा है।
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इसमें भारत में विकसित मैनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया है। यह इंजन इतना उन्नत बताया जा रहा है कि मिसाइल लक्ष्य के आसपास अपनी दिशा बदल सकती है और अंतिम क्षणों में पिन-पॉइंट सटीकता के साथ हमला कर सकती है।

इस परियोजना का सफर आसान नहीं रहा। विकास के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं। वर्ष 2020 में तो ऐसा समय भी आया जब लगा कि यह परियोजना सफल नहीं हो पाएगी। उस दौरान पश्चिमी मीडिया में भी कई तरह की शंकाएं जताई गईं, लेकिन DRDO के वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास जारी रखे।
आखिरकार 15 जून को ओडिशा तट पर इस मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया और भारत ने दुनिया के सामने अपनी तकनीकी क्षमता का एक और बड़ा प्रमाण पेश किया।
रक्षा विशेषज्ञ इस मिसाइल की तुलना अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल से कर रहे हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से भारत की ‘घोस्ट’ मिसाइल कई मामलों में टॉमहॉक से भी अधिक उन्नत साबित हो सकती है।
हाल के वैश्विक संघर्षों ने यह साबित किया है कि आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली मिसाइलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ‘घोस्ट’ मिसाइल का सफल विकास भारत की रक्षा शक्ति को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।






